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मिट्टी का घड़ा (लघुकथा)

4.7
116

"अरे कोई मेरा वह मिट्टी का घड़ा भर कर यहाँ रख  दो, पता नहीं कौन सी साँस आखरी हो? मैं चाहती हूँ कि मेरी अंतिम साँस उसी घड़े के पानी को पी कर बुझे।"  नीमा दादी अपने पास बैठी पोती सुमन से कहती हैं। ये ...

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लेखक के बारे में
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Uma Vaishnav

ऐसी जिन्दगी जीऊं जो किसी के काम आए। भूल से भी किसी का दिल न दुखाऊं।हमेशा अपनाे का साथ रहे।अपने विरोद्धीयों का भी आभार मानती हूँ।जिन्होंने मुझे अपनी कमीयो से अवगत कराया........ You may send me your feedback on my email uma. [email protected] https://youtube.com/channel/UCO1gQf-V6Av_AHR23sP6Jdw

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    साहित्य सृजन
    07 जून 2021
    बहुत खूब.. बढ़िया है
  • author
    Swati Deshmukh
    08 जून 2021
    बहुत ही बढ़िया
  • author
    यस यादव
    07 जून 2021
    Great story
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    साहित्य सृजन
    07 जून 2021
    बहुत खूब.. बढ़िया है
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    Swati Deshmukh
    08 जून 2021
    बहुत ही बढ़िया
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    यस यादव
    07 जून 2021
    Great story