pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मिल गई मंजिल

4.3
9368

अजय की नौकरी छूटे आज तीन महीने हो रहे थे ,कोई दूसरी नौकरी नहीं मिली थी...यहाँ - वहाँ भटकते परेशान अजय समाचार - पत्र में वेकेंसी देखते बैठा था ...तभी उसकी पत्नी अलका ढेर सारे सामान लेकर अंदर आई। ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

डॉ. दीक्षा चौबे ,व्याख्याता ,एम. एस. सी.,एम.ए. पी. एच. डी. दुर्ग , छत्तीसगढ़

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mamata Khare
    10 मई 2018
    धैर्य और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत करती कहानी ।पाठकों के लिए प्रेरक ।
  • author
    Prakash Srivastava
    14 मई 2018
    एक योग्य, समर्पित एवं प्यार करने वाली सहचरी का मिलना अनमोल खजाने के समान है। इसी को स्वर्ग प्राप्ति की अनुभूति होना कहते हैं। मिल गयी तो आप पूरे जीवन में धनी बने रहेंगे।
  • author
    Kalpana Shukla
    20 मई 2018
    It's correct.this story is my real life story.aj apna past yad aa gya
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mamata Khare
    10 मई 2018
    धैर्य और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत करती कहानी ।पाठकों के लिए प्रेरक ।
  • author
    Prakash Srivastava
    14 मई 2018
    एक योग्य, समर्पित एवं प्यार करने वाली सहचरी का मिलना अनमोल खजाने के समान है। इसी को स्वर्ग प्राप्ति की अनुभूति होना कहते हैं। मिल गयी तो आप पूरे जीवन में धनी बने रहेंगे।
  • author
    Kalpana Shukla
    20 मई 2018
    It's correct.this story is my real life story.aj apna past yad aa gya