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मेरी तौबा

4.3
18042

"कुछ सोच रही हो " मैंने उसका हाँथ हौले से दबाकर पूछा "नहीं तो " नेहा के चेहरे पर शरारत की लहर दौड़ गई अब वो आसानी से बताएगी नहीं ,जब तक मैं उससे ८ -१० बार पूछ नहीं लूँगा . चार सालों से जानते है ...

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लेखक के बारे में
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सोनल रस्तोगी
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ravi Prakash
    28 मे 2018
    बेहतरीन कहानी । छोटी सी कहानी में कितनी बड़ी बात है ।
  • author
    Kumud Rai
    28 मे 2018
    woow sonal ji.... kya likhte ho aap... bahut khoob... God bless u... dil ko chhu gyi... bahut khoobsurat lgi
  • author
    राजेश सिन्हा
    09 जुलै 2019
    पढ़ कर चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
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  • author
    Ravi Prakash
    28 मे 2018
    बेहतरीन कहानी । छोटी सी कहानी में कितनी बड़ी बात है ।
  • author
    Kumud Rai
    28 मे 2018
    woow sonal ji.... kya likhte ho aap... bahut khoob... God bless u... dil ko chhu gyi... bahut khoobsurat lgi
  • author
    राजेश सिन्हा
    09 जुलै 2019
    पढ़ कर चेहरे पर मुस्कान आ गयी।