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मेरा पहला प्यार

4.2
1627

वो गुलाबी जाड़ा पसरा हुआ धूप मेरी छत पर खिली धूप में नहाई मैं ठिठकी थी पहली बार जब नजरें मिली थी तुमसे पहली बार तुम्हारी सफेद कमीज चांदनी रात में चांद की तरह खिला हुआ मेरी नजरों में समा गया--- इन ...

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लेखक के बारे में
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सीमा संगसार
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rakesh suthar
    08 এপ্রিল 2018
    very good
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    20 অক্টোবর 2015
    वावरी , कुनवा  इत्यादि जैसे शब्दों की भरमार है जो राष्ट्र भाषा का अपमान करते हैं ।एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
  • author
    Sweta Pant "Seemu"
    19 ডিসেম্বর 2022
    nice lines ma'am Can you please read my stories and poems and please give me support
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  • author
    Rakesh suthar
    08 এপ্রিল 2018
    very good
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    20 অক্টোবর 2015
    वावरी , कुनवा  इत्यादि जैसे शब्दों की भरमार है जो राष्ट्र भाषा का अपमान करते हैं ।एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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    Sweta Pant "Seemu"
    19 ডিসেম্বর 2022
    nice lines ma'am Can you please read my stories and poems and please give me support