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मीत मिला मन का-

4.3
12196

जून महीने की गर्मी की शाम थी। देवकीनंदन ने पंखे की गति को और बढ़ा दियाथा,पर हवा ना के बराबर ही लग रही थी । गर्मी से बेचैन वे घर के अन्दर हीबैठे थे । जिस कारण घुटन महसूस हो रही थी।सामने की दीवार पर ...

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लेखक के बारे में
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सुरेखा शर्मा

डा.सुरेखा शर्मा (पूर्व हिन्दी/संस्कृत विभागाध्यक्ष) सदस्या -नीति आयोग, समीक्षक /स्वतन्त्र लेखन. पच्चास से अधिक कहानियां,आलेख,व्यंग्य, कविताएं, नाटक आदि विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित । दो कहानी संग्रह, बाल कविता,बाल एकांकी का प्रकाशन । सम्प्रति -कादम्बिनी क्लब गुड़गांव संचालिका

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Surekha Sharma
    28 अगस्त 2018
    धन्यवाद प्रतिलिपि टीम
  • author
    Bharti Sharma
    18 सितम्बर 2018
    Beautifully रिटेन
  • author
    C.K Chandna
    16 अक्टूबर 2018
    Nice story .ek dusre ke saath Sukh dukh baatne se Maan halka ho jaata ha.
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    Surekha Sharma
    28 अगस्त 2018
    धन्यवाद प्रतिलिपि टीम
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    Bharti Sharma
    18 सितम्बर 2018
    Beautifully रिटेन
  • author
    C.K Chandna
    16 अक्टूबर 2018
    Nice story .ek dusre ke saath Sukh dukh baatne se Maan halka ho jaata ha.