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मौत बाँटती रूह

4.3
9187

यह घटना आज से लगभग चालीस साल पुरानी है..जब एक भटकती रूह का कहर हमारे गाँव पर टूटा था.. एक ऐसी रूह जो मौत बाँटती थी.. वह कभी भी ..कहीं भी..किसी को भी अपना शिकार बना लेती थी..इतने साल बीत जाने के ...

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लेखक के बारे में

तेरे बिना हर शाम अधूरी।तुम मिल जाओ गर हर कमी हो पूरी

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2018
    शानदार भाईसाहब राजस्थान हरयाणा में ऐसे किस्से आम है।😊
  • author
    Santosh Bastiya
    24 ഒക്റ്റോബര്‍ 2018
    मस्त है। कृपया मेरी कहानी अंधेरों के साये भी अवश्य पढ़ें और सुझाव दें
  • author
    MAN MOHAN SINGH
    01 നവംബര്‍ 2018
    aapki kahani sabse alag hatkar hoti hai sur hakikat lagti hai bilkul bahaut accha likhte ho aap thanks
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    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2018
    शानदार भाईसाहब राजस्थान हरयाणा में ऐसे किस्से आम है।😊
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    Santosh Bastiya
    24 ഒക്റ്റോബര്‍ 2018
    मस्त है। कृपया मेरी कहानी अंधेरों के साये भी अवश्य पढ़ें और सुझाव दें
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    MAN MOHAN SINGH
    01 നവംബര്‍ 2018
    aapki kahani sabse alag hatkar hoti hai sur hakikat lagti hai bilkul bahaut accha likhte ho aap thanks