बीते गम हम ढोयें क्यों घुट-घुट कर हम रोयें क्यों हासिल है जो नरम बिछौना कांटो पर हम सोयें क्यों जहरीले जिनके बीज बनें हम ऐसी फसलें बोयें क्यों जो खुशी मुंतज़िर है हमारी फिर ...
एक मां हूं।
"बरसों पहले एक सितारा मेरे आँगन उतरा था
वही उजाला आज मेरे चहुँओर दिखाई देता है"
(पुत्र को समर्पित)
पूरा नाम - नीता धनखड़
शिक्षा- M.A. (हिंदी,राजनीति विज्ञान) M.Ed.
लेखन -नज़्म, ग़ज़ल,मुक्तक,कविता,दोहे,गीत
अन्य अभिरुचि के विषय - अध्यात्म,ज्योतिष्, दर्शन शास्त्र,मनोविज्ञान।
पहला प्यार - भारतीय सेना
जन्म व निवास स्थान- रोहतक,हरियाणा।
सारांश
एक मां हूं।
"बरसों पहले एक सितारा मेरे आँगन उतरा था
वही उजाला आज मेरे चहुँओर दिखाई देता है"
(पुत्र को समर्पित)
पूरा नाम - नीता धनखड़
शिक्षा- M.A. (हिंदी,राजनीति विज्ञान) M.Ed.
लेखन -नज़्म, ग़ज़ल,मुक्तक,कविता,दोहे,गीत
अन्य अभिरुचि के विषय - अध्यात्म,ज्योतिष्, दर्शन शास्त्र,मनोविज्ञान।
पहला प्यार - भारतीय सेना
जन्म व निवास स्थान- रोहतक,हरियाणा।
बेहद सुन्दर सकारात्मकता लिए हुई कविता...टाइटल ही जोश भरा है तो कविता तो शानदार होनी ही थी,,, ओशो की झलक मिली इस कविता को पढ़कर दी,, बेहद शानदार लेखन 😃👌👌👌❣️❣️
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
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सृजन मिले जब नित अनुपम
तो खिचड़ी पढकर रोयें क्यों।
बहे गंग की धार यहाँ
तो मलिन भाव फिर ढोये क्यों।
जब लेखन को मन श्याम मिले
तो शब्द सुगंध के खोये क्यों।
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बेहद सुन्दर सकारात्मकता लिए हुई कविता...टाइटल ही जोश भरा है तो कविता तो शानदार होनी ही थी,,, ओशो की झलक मिली इस कविता को पढ़कर दी,, बेहद शानदार लेखन 😃👌👌👌❣️❣️
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सृजन मिले जब नित अनुपम
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