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मौज लो, रोज लो ,ना मिले तो खोज लो!

4.9
122

बीते   गम   हम  ढोयें  क्यों घुट-घुट  कर  हम रोयें क्यों हासिल है जो नरम बिछौना कांटो  पर   हम  सोयें  क्यों जहरीले   जिनके  बीज बनें हम  ऐसी  फसलें  बोयें क्यों जो खुशी  मुंतज़िर है हमारी फिर ...

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लेखक के बारे में
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नीटू कुमार

एक मां हूं। "बरसों पहले एक सितारा मेरे आँगन उतरा था वही उजाला आज मेरे चहुँओर दिखाई देता है" (पुत्र को समर्पित) पूरा नाम - नीता धनखड़ शिक्षा- M.A. (हिंदी,राजनीति विज्ञान) M.Ed. लेखन -नज़्म, ग़ज़ल,मुक्तक,कविता,दोहे,गीत अन्य अभिरुचि के विषय - अध्यात्म,ज्योतिष्, दर्शन शास्त्र,मनोविज्ञान। पहला प्यार - भारतीय सेना जन्म व निवास स्थान- रोहतक,हरियाणा।

समीक्षा
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    20 ஜனவரி 2021
    बेहद सुन्दर सकारात्मकता लिए हुई कविता...टाइटल ही जोश भरा है तो कविता तो शानदार होनी ही थी,,, ओशो की झलक मिली इस कविता को पढ़कर दी,, बेहद शानदार लेखन 😃👌👌👌❣️❣️
  • author
    20 ஜனவரி 2021
    सृजन मिले जब नित अनुपम तो खिचड़ी पढकर रोयें क्यों। बहे गंग की धार यहाँ तो मलिन भाव फिर ढोये क्यों। जब लेखन को मन श्याम मिले तो शब्द सुगंध के खोये क्यों।
  • author
    Kalyani Jha "Kalyani"
    20 ஜனவரி 2021
    क्या बात है दी ! बेहद शानदार 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻❣️❣️🙏🏻🙏🏻
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    20 ஜனவரி 2021
    बेहद सुन्दर सकारात्मकता लिए हुई कविता...टाइटल ही जोश भरा है तो कविता तो शानदार होनी ही थी,,, ओशो की झलक मिली इस कविता को पढ़कर दी,, बेहद शानदार लेखन 😃👌👌👌❣️❣️
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    20 ஜனவரி 2021
    सृजन मिले जब नित अनुपम तो खिचड़ी पढकर रोयें क्यों। बहे गंग की धार यहाँ तो मलिन भाव फिर ढोये क्यों। जब लेखन को मन श्याम मिले तो शब्द सुगंध के खोये क्यों।
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    Kalyani Jha "Kalyani"
    20 ஜனவரி 2021
    क्या बात है दी ! बेहद शानदार 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻❣️❣️🙏🏻🙏🏻