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मासूम सबक

4.5
8857

ओहो पापा जी! आप कैसे खाना खाते हो? आज फिर गिरा दिया। समीर देखो न।" सुरभि लगभग चिल्लाकर बोली। समीर ने उखड़ी निगाहों से दादाजी को देखा। दादाजी ने खुद को कंपकपाते हाथों से संभालने की बहुत कोशिश की ...

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लेखक के बारे में
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वीना सिंह

स्वतंत्र लेखिका प्रकाशन - शोध ग्रंथ - लोक साहित्य, विभिन्न हिंदी पाठ्य पुस्तकें,, व्याकरण कक्षा १-८, 7 साझा काव्य संकलन , 7 साझा लघु कथा संग्रह लेख आदि प्रकाशन- भाषा भारती, नवपल्लव , शब्द सुमन , सिनर्जी ,हरि गंधा, हिमालिनी, जगमगदीप ज्योति, मधु संबोध, साहित्य कलश आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख, कहानियाँ, कविताएँ आदि सम्मान- विविन्न संस्थाओं द्वारा साहित्य सेवा व हिंदी सेवा सम्मान आदि.आदर्श राष्ट्रभाषा शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्र रत्न सम्मान, श्रेष्ठ लघुकथाकार सम्मान आदि|

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ravindra Narayan Pahalwan
    13 फ़रवरी 2019
    रचना की विषयवस्तु श्रेष्ठ है / मुझे आपकी रचना ने प्रभावित किया / एक बहुत अच्छी रचना के लिए धन्यवाद...
  • author
    PRIYA JOSHI
    13 फ़रवरी 2019
    यह आज के समाज की सच्चाई पर आधारित है।
  • author
    25 जुलाई 2018
    बच्चों पर किसी भी बात का जल्दी असर होता हैं कोमल मन मस्तिष्क पर सब बहुत तेजी से अमल में लाते हैं बच्चे।कहानी आपकी एक सबक देती हैं हमारे समाज को जहाँ वाकई में इस तरह के कई केस हैं दर्ज अदालत की दहलीज पर। सार्थक और अर्थपूर्ण है कहानी आपकी वीणा जी।
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    Ravindra Narayan Pahalwan
    13 फ़रवरी 2019
    रचना की विषयवस्तु श्रेष्ठ है / मुझे आपकी रचना ने प्रभावित किया / एक बहुत अच्छी रचना के लिए धन्यवाद...
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    PRIYA JOSHI
    13 फ़रवरी 2019
    यह आज के समाज की सच्चाई पर आधारित है।
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    25 जुलाई 2018
    बच्चों पर किसी भी बात का जल्दी असर होता हैं कोमल मन मस्तिष्क पर सब बहुत तेजी से अमल में लाते हैं बच्चे।कहानी आपकी एक सबक देती हैं हमारे समाज को जहाँ वाकई में इस तरह के कई केस हैं दर्ज अदालत की दहलीज पर। सार्थक और अर्थपूर्ण है कहानी आपकी वीणा जी।