ठक! ठक! ठक ! दरवाजे पे जोर से खटखट करते हुवे देव को महसूस हुआ की रात के ग्यारह बज रहे हैं. सब सो गए होंगे. इसलिए उसने खटखट धीमे कर दी. बाहर पूरा भोपाल झमझमा रहा था. आज तो बड़े तालाब का मकबरा डूब ...

प्रतिलिपिठक! ठक! ठक ! दरवाजे पे जोर से खटखट करते हुवे देव को महसूस हुआ की रात के ग्यारह बज रहे हैं. सब सो गए होंगे. इसलिए उसने खटखट धीमे कर दी. बाहर पूरा भोपाल झमझमा रहा था. आज तो बड़े तालाब का मकबरा डूब ...