pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

शादी कार्ड

4.3
20223

उसने एक बार फिर कलाई में बंधी घड़ी को घूर कर देखा। "4 बजकर 40 मिनट", फिर ये सोंच कर कि शायद घड़ी गलत हो, उसने मोबाइल में टाइम चेक किया। "4 बजकर 40 मिनट" यानी 5 बजने में अभी भी काफ़ी देर थी। "ये स्साला ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

प्रेम की अनुपस्थिति में प्रेम की व्याप्ति पर लिखना कुछ इस तरह होता है कि हमे उस सपने का उल्लेख करना है जो हमने रात में सबसे गहरी नींद में सोते हुए देखा था और अफ़सोस तो इस बात का है कि सुबह होते ही हम उसे भूल भी चुके हैं । - राहुल पाण्डेय

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरुण खामखाह
    15 अप्रैल 2019
    एक शेर याद आया.. "शामिल है मेरा खून-ए-जिगर तेरी हिना में ये कम है तो खून-ए-वफ़ा साथ लिये जा"
  • author
    Subhash Gupta
    15 अप्रैल 2019
    हर कोई इतना खुश नसीब नहीं होता कुछ होते हैं जो अपनी ही लाश को अपने ही कंधो पर ढोने को मजबूर होते हैं शायद उनकी सजा मुकम्मल नही हुई हो
  • author
    kitttu "Kia"
    27 जनवरी 2018
    smjh ni ata mohabt ka endmaut hi kyu h .....yr jisse apne pyr bo apke ki aisi hlt to kbi ni chega gr pyr .vakai m.schaa h
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरुण खामखाह
    15 अप्रैल 2019
    एक शेर याद आया.. "शामिल है मेरा खून-ए-जिगर तेरी हिना में ये कम है तो खून-ए-वफ़ा साथ लिये जा"
  • author
    Subhash Gupta
    15 अप्रैल 2019
    हर कोई इतना खुश नसीब नहीं होता कुछ होते हैं जो अपनी ही लाश को अपने ही कंधो पर ढोने को मजबूर होते हैं शायद उनकी सजा मुकम्मल नही हुई हो
  • author
    kitttu "Kia"
    27 जनवरी 2018
    smjh ni ata mohabt ka endmaut hi kyu h .....yr jisse apne pyr bo apke ki aisi hlt to kbi ni chega gr pyr .vakai m.schaa h