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"मर्दानी दिशा"

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दिशा बोली, ख़ुद को स्ट्रोंग बनाओ, "वो ज़माना गया जब मर्दों के रहते राह चलती औरत को छूना तो दूर, कोई बुरी नज़र से देख भी नहीं सकता था। “आज-कल मर्द सिर्फ बेडरूम में मिलते हैं, सड़कों पर तो भेड़िए ...

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लेखक के बारे में

डॉ. हरेंद्र सिंह चाहर आगरा शहर से सम्बन्ध रखते हैं। अध्यापक पिता से लेखन विरासत में मिला है। पेशे से वैज्ञानिक डॉ. चाहर प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली, से पीएचडी (PhD) करने के पश्चात अभी अमेरिका में विषाणु विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत हैं। जिज्ञासाओं को उनके तार्किक अंत तक पहुँचाने के लिए विज्ञान करते हैं और मन की ख़ुशी और शांति के लिए कवितायेँ और कहानियाँ लिखते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (IHA) की त्रेमासिक पत्रिका “विश्वा” और IHA ह्यूस्टन चैप्टर की पत्रिका “गुंजन” में अनेक कवितायेँ प्रकाशित । इसी के साथ अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम “हिंदी कविता की शाम”, “होली के हिंदी बोल”, “मैं और मेरी मातृभूमि" में हर वर्ष काव्यपाठ ।

समीक्षा
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    P M
    26 ডিসেম্বর 2018
    बेहतरीन सोच ....दिल खुश हो गया ऐसी कहानी पढकर, जिसमें औरत को कमजोर अबला की भांति प्रस्तुत करने की जगह एक सशक्त व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है । और बिलकुल ठीक कहा आपने, आज की नारी को खुद ही अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयार रहना चाहिए । किसी से कुछ उम्मीद क्यों करना? साथ ही यह भी एक कटु सत्य है कि किसी को मुसीबत में फंसा देखकर भी अनदेखा करना लोगों की फितरत बन चुकी है ।
  • author
    26 ডিসেম্বর 2018
    सच कहा सडकों पर आजकल सिर्फ भेडिये ही रह गए हैं, या फिर झुंड में खडी भेडें ।जिस स्तर पर पतन हो रहा है लोगों की सोच का ,हर लडकी को खुद अपनी रक्षा करनी होगी । आपकी कहानी बहुत सार्थक संदेश दे रही है। और कहानी का अंत बेहतरीन है ,अलग सी खुशी का अहसास हुआ कहानी का अंत पढकर। श्रेष्ठ कहानी के लिए आप बधाई 💐💐💐💐💐💐💐💐💐
  • author
    हेमंत मोढ़ "Happy-Mentor"
    20 মে 2019
    दमदार, शानदार कहानी, इस कहानी पर फिल्म बनाना चाहिए, जिससे, अबलाओं को सबला बनने की प्रेरणा मिलें ! Email [email protected]
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    P M
    26 ডিসেম্বর 2018
    बेहतरीन सोच ....दिल खुश हो गया ऐसी कहानी पढकर, जिसमें औरत को कमजोर अबला की भांति प्रस्तुत करने की जगह एक सशक्त व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है । और बिलकुल ठीक कहा आपने, आज की नारी को खुद ही अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयार रहना चाहिए । किसी से कुछ उम्मीद क्यों करना? साथ ही यह भी एक कटु सत्य है कि किसी को मुसीबत में फंसा देखकर भी अनदेखा करना लोगों की फितरत बन चुकी है ।
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    26 ডিসেম্বর 2018
    सच कहा सडकों पर आजकल सिर्फ भेडिये ही रह गए हैं, या फिर झुंड में खडी भेडें ।जिस स्तर पर पतन हो रहा है लोगों की सोच का ,हर लडकी को खुद अपनी रक्षा करनी होगी । आपकी कहानी बहुत सार्थक संदेश दे रही है। और कहानी का अंत बेहतरीन है ,अलग सी खुशी का अहसास हुआ कहानी का अंत पढकर। श्रेष्ठ कहानी के लिए आप बधाई 💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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    हेमंत मोढ़ "Happy-Mentor"
    20 মে 2019
    दमदार, शानदार कहानी, इस कहानी पर फिल्म बनाना चाहिए, जिससे, अबलाओं को सबला बनने की प्रेरणा मिलें ! Email [email protected]