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मनुस्मृति।

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यथा  महा ह्रदं  प्राप्य खिपतं  लोस्टं बिनस्यती। तथा दुश्चरितं सर्वं वेदे त्रिवृति मज्जति। अर्थात महर्षि मनु ने अपनी मनु संहिता के एकादश अध्याय की श्लोक 264 मैं ये कहा है की, अगर हम महा समुंदर मैं ...

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लेखक के बारे में
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Angel Parnika

हम लेखक तो नहिं है पर लिखने की कोशिश जरूर करते हैं।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Asha Bagarti
    01 फ़रवरी 2023
    👍👍👍👍👍 Nice
  • author
    👑princess🔥 🖤
    01 फ़रवरी 2023
    bhut sundar likha hai aapne 💐💐✍️
  • author
    Secret Writer
    01 फ़रवरी 2023
    सत्य वचन हैं 👌👌🙏🙏✍️✍️✍️
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    Asha Bagarti
    01 फ़रवरी 2023
    👍👍👍👍👍 Nice
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    👑princess🔥 🖤
    01 फ़रवरी 2023
    bhut sundar likha hai aapne 💐💐✍️
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    Secret Writer
    01 फ़रवरी 2023
    सत्य वचन हैं 👌👌🙏🙏✍️✍️✍️