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मंजु जी की मनुहार....

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मंजु जी आपकी प्यारी सी है मनुहार..... बस आपने जैसे ही किया हुक्म... तुरंत हमने चाय बनाने का किया विचार... आप जब तक आओगी तब तक हो जाएगी चाय तैयार... अदरख के साथ इलायची भी है डाला.... आपके ...

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लेखक के बारे में

मैं पेशे से एडवोकेट हूँ पर पढ़ना और लिखना मेरा शौक है......प्रतिलिपि एक ऐसा माध्यम है जिसकी वजह से मैं अपने मन कि भावनाओं को रचनाओं के द्वारा लोगो तक पंहुचा सकती हूँ..... मेरी सभी रचनाएँ स्वरचित और मौलिक है और सर्वाधिकार सुरक्षित है ll तथा कॉपी राइट एक्ट के अंतर्गत प्रस्तावित है l अन्यथा की स्थिति मे हाई कोर्ट लखनऊ बेंच में कार्यवाही की जाएगी..l सुषमा सिंह (एडवोकेट )

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rakesh Chaurasia
    04 मार्च 2020
    very nice
  • author
    Hemalata Godbole
    04 मार्च 2020
    शायदापको होली का हुडदंग मनाना है।इसीलिए सहेलियों को चाय पे बुलाना है ।मैं आऊँ क्या? चाय के रंग मे भंग न डालून्गी बस कुछ गीत सुना डालून्गी।और आप सुनाये पर जोर से ।मुझे कम सुनाई देने लगा है।पर दिखाई सब देता है।शुभकामनाएँ
  • author
    कल्याणी दास
    04 मार्च 2020
    वाह वाह बहुत खूब, सुषमा 😍😍😍 बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने। जरूर जी, सखियों के साथ इस बार होली बहुत ही स्पेशल होने वाली है।❤️❤️
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    Rakesh Chaurasia
    04 मार्च 2020
    very nice
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    Hemalata Godbole
    04 मार्च 2020
    शायदापको होली का हुडदंग मनाना है।इसीलिए सहेलियों को चाय पे बुलाना है ।मैं आऊँ क्या? चाय के रंग मे भंग न डालून्गी बस कुछ गीत सुना डालून्गी।और आप सुनाये पर जोर से ।मुझे कम सुनाई देने लगा है।पर दिखाई सब देता है।शुभकामनाएँ
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    कल्याणी दास
    04 मार्च 2020
    वाह वाह बहुत खूब, सुषमा 😍😍😍 बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने। जरूर जी, सखियों के साथ इस बार होली बहुत ही स्पेशल होने वाली है।❤️❤️