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मनहूस कौन ?

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4.4

“ भारती कितनी बार कहा है तुझसे कि मुन्ने को मनोरमा से दूर रखाकर, पर तू सुनती कहाँ है ...अभी मैं छुड़ा कर लायी हूँ मुन्ने को उसकी गोद से ...कैसे घूरकर देखे जा रही थी, मेरे पोते को ...मनहूस कही की ...