pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मन पगला

897
4.2

अमावस की अंधेरी में भी नहा लेता है उजली चांदनी में। तपती, झुलसती धूप में जलते खुले आसमान के नीचे भी पा लेता है घने तरुवर की शीतल छाँव।। मन पगला कुहासों के नम ठिठुरते अंधेरों में ढूंढ लेता ...