pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मन में धधक रही है..

5
5

कुछ हुआ है कुछ तो हुआ है सब तरफ़ धुआँ है हाँ! धुआँ-धुआँ है! इसका मतलब यह नहीं हाँ! इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि आग बुझने को है! मन तक में धधक भी रही है भभक भी रही है चारों तरफ़ चारों  तरफ़, नज़रें ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Santosh K. Goriya

हम, अपने हृदय की गूँज को कविताओं और कहानियों के रूप में यहाँ पर संकलित कर रहे हैं केवल इसलिए कि अगले जन्म में आकर पुनः पढ सकें और देख सकें कि हमारी मनोवांछना ने कौन सा आकार धारण किया है! मैं चाहूँ, हर रूप में ढल जाऊँ खुद को सभी के भावों में पाऊँ। दुःख-दर्द उनके अपनाऊँ खोजूँ नए रास्ते, दुःख मिटाऊँ। हँसूँ-मुस्काऊँ सबके संग सबको जीवन का वैभव दिखलाऊँ।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    23 सितम्बर 2025
    very nice 👌
  • author
    Naren Kumar
    23 सितम्बर 2025
    acha likha hai aapne
  • author
    Shubhi
    23 सितम्बर 2025
    शानदार पंक्तियां
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    23 सितम्बर 2025
    very nice 👌
  • author
    Naren Kumar
    23 सितम्बर 2025
    acha likha hai aapne
  • author
    Shubhi
    23 सितम्बर 2025
    शानदार पंक्तियां