कुछ हुआ है कुछ तो हुआ है सब तरफ़ धुआँ है हाँ! धुआँ-धुआँ है! इसका मतलब यह नहीं हाँ! इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि आग बुझने को है! मन तक में धधक भी रही है भभक भी रही है चारों तरफ़ चारों तरफ़, नज़रें ...
हम, अपने हृदय की गूँज को कविताओं और कहानियों के रूप में यहाँ पर संकलित कर रहे हैं केवल इसलिए कि अगले जन्म में आकर पुनः पढ सकें और देख सकें कि हमारी मनोवांछना ने कौन सा आकार धारण किया है!
मैं चाहूँ, हर रूप में ढल जाऊँ
खुद को सभी के भावों में पाऊँ।
दुःख-दर्द उनके अपनाऊँ
खोजूँ नए रास्ते, दुःख मिटाऊँ।
हँसूँ-मुस्काऊँ सबके संग
सबको जीवन का वैभव दिखलाऊँ।
सारांश
हम, अपने हृदय की गूँज को कविताओं और कहानियों के रूप में यहाँ पर संकलित कर रहे हैं केवल इसलिए कि अगले जन्म में आकर पुनः पढ सकें और देख सकें कि हमारी मनोवांछना ने कौन सा आकार धारण किया है!
मैं चाहूँ, हर रूप में ढल जाऊँ
खुद को सभी के भावों में पाऊँ।
दुःख-दर्द उनके अपनाऊँ
खोजूँ नए रास्ते, दुःख मिटाऊँ।
हँसूँ-मुस्काऊँ सबके संग
सबको जीवन का वैभव दिखलाऊँ।
रिपोर्ट की समस्या
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