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मन के कागज पर

4.1
799

मन के कोरे कागज पर एक हर्फ़ लिखा प्रेम और भूल गयी सारे आडम्बर दुनियां के ऊँच नीच भेदभाव जाति पांत रीति रिवाज प्रेम सुधा से ओतप्रोत होकर जीवन को अमृत बना लिया डूब गयी आकंठ दर्द के सागर में अमावस से गहन ...

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लेखक के बारे में

आओगे जब तुम औ सजना अंगना फूल खिलेंगे , , , sirf tum    शिक्षा_         एम.ए. संस्कृत( रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय,बरेली)   अन्य_                         लघु शोध , “कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कोर्स ” सम्मान _                     सारस्वत सम्मान, विशिष्ट सरस्वती रत्न सम्मान सम्प्रति _           आल इंडिया रेडियो , अनाउन्सर   सृजन _        कविता , कहानी , लेख आदि प्रकाशन_                       एक काव्य संग्रह ‘ये मेरा आसमां’ व एक कहानी संग्रह “लिव लाइफ” प्रकाशित   कथादेश, परिकथा ,कादम्बिनी , दैनिक जागरण ., अमर उजाला , लहक, समाज कल्याण, मधुराक्षर, करुणावती साहित्यधारा आदि अनेकों साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित   आकाशवाणी, दूरदर्शन पर कविता कहानी व परिचर्चा में सहभागिता और साहित्यिक गोष्ठी,  कविता कोष में रचनाओं का शामिल होना ....  

समीक्षा
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    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
  • author
    मनोज गुप्ता "#man0707"
    11 मई 2021
    prem ki sunder abhivyaktee . bahut sunder :)
  • author
    ✍कु." प्रियंका "
    05 अगस्त 2021
    बढ़िया कोशिश 👌👌👌
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    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
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    मनोज गुप्ता "#man0707"
    11 मई 2021
    prem ki sunder abhivyaktee . bahut sunder :)
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    ✍कु." प्रियंका "
    05 अगस्त 2021
    बढ़िया कोशिश 👌👌👌