मन चंचल, मन बावरा जाने क्या ये सोच रहा जिस डगर जाना नही उसका रास्ता पूछ रहा। मुश्किल है इश्क़ की राह है खबर इसे भी फिर भी उसकी गली में जाने के बहाने ढूंढ रहा। रुक जा यही, ठहर जा मन बावरे ना जा उस गली ...

प्रतिलिपिमन चंचल, मन बावरा जाने क्या ये सोच रहा जिस डगर जाना नही उसका रास्ता पूछ रहा। मुश्किल है इश्क़ की राह है खबर इसे भी फिर भी उसकी गली में जाने के बहाने ढूंढ रहा। रुक जा यही, ठहर जा मन बावरे ना जा उस गली ...