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माँ

4.0
1083

माँ एक शब्द अथाह सागर सा अर्थ लिए, कृत्रिम नहीं सच सी प्रतिमूर्ति लिए, ममता का उद्वेलित भाव लिए, प्यार से सदा भरा आँचल लिए, पीड़ा वहन कर ख़ुशी का मार्ग लिए, तौफा खुदा का अपनी आभा लिए, बच्चे के हर दर्द ...

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लेखक के बारे में
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मीना कुमारी

✍लेखन में ख्वाब जीना चाहती हूँ, तुलनात्मक अभिव्यक्ति से परे अपनी पहचान में जीना चाहती हूँ, नयी हूँ पुराने की आभा से अभिभूत होना चाहती हूँ, जान सको तो जानना, पहचान सको तो पहचानना, समझ सको तो समझना,भ्रम से परे, झूठ से परे, गलत से परे, सही सोच और समझ से मानना, शब्दों में भाव भी होते हैं और एहसास भी होते हैं, अनुवादक अर्थ तक सीमित मत रह जाना, लेखन के मर्म को महसूस कर पाओ, शब्दों और भावों का मान रख लेना, दिल दिमाग से अभिव्यक्ति और प्रस्तुति की सही समझ से समझना !

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sintu Kumar
    12 जुलाई 2018
    माँ एक शब्द अथाह सागर सा अर्थ लिए,, माँ एक शब्द..!!
  • author
    Rohit Paikra
    08 मार्च 2019
    सुंदर
  • author
    MAHESH CHAND Sharma
    18 जुलाई 2021
    माँ एक शब्द नहीं स॔सार है। बहुत अच्छी रचना है।
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sintu Kumar
    12 जुलाई 2018
    माँ एक शब्द अथाह सागर सा अर्थ लिए,, माँ एक शब्द..!!
  • author
    Rohit Paikra
    08 मार्च 2019
    सुंदर
  • author
    MAHESH CHAND Sharma
    18 जुलाई 2021
    माँ एक शब्द नहीं स॔सार है। बहुत अच्छी रचना है।