✍लेखन में ख्वाब जीना चाहती हूँ,
तुलनात्मक अभिव्यक्ति से परे अपनी पहचान में जीना चाहती हूँ, नयी हूँ पुराने की आभा से अभिभूत होना चाहती हूँ, जान सको तो जानना, पहचान सको तो पहचानना, समझ सको तो समझना,भ्रम से परे, झूठ से परे, गलत से परे, सही सोच और समझ से मानना,
शब्दों में भाव भी होते हैं और एहसास भी होते हैं,
अनुवादक अर्थ तक सीमित मत रह जाना,
लेखन के मर्म को महसूस कर पाओ,
शब्दों और भावों का मान रख लेना,
दिल दिमाग से अभिव्यक्ति और प्रस्तुति की सही समझ से समझना !
रिपोर्ट की समस्या
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