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ममता के आँसू

4.4
21387

अभी माँ का अंतिम संस्कार करके आया हूँ. माँ के बिस्तर को हटा कर वहाँ दिया जला दिया गया है, तेरह दिन तक यहाँ दिया जलता रहेगा. माँ की आत्मा यहीं रहेगी मेरे साथ, इसी कमरे में, ऐसा मेरा विश्वास था. ...

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लेखक के बारे में
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शील निगम

शील निगम. आगरा (उ. प्रदेश )में जन्म ६ दिसम्बर , १९५२ . शिक्षा-बी.ए.बी.एड. कवयित्री, कहानी तथा स्क्रिप्ट लेखिका. मुंबई में १५ वर्ष प्रधानाचार्या तथा दस वर्षों तक हिंदी अध्यापन. विद्यार्थी जीवन में अनेक नाटकों,लोकनृत्योंतथा साहित्यिक प्रतियोगिताओं में सफलतापूर्वक प्रतिभाग एवं पुरुस्कृत. दूरदर्शन पर काव्य-गोष्ठियों में प्रतिभाग एवं संचालन तथा साक्षात्कारों का प्रसारण. आकाशवाणी के मुंबई केंद्र से रेडियो तथा ज़ी टी.वी. पर कहानियों का प्रसारण. प्रसारित कहानियाँ -'परंपरा का अंत' 'तोहफा प्यार का', 'चुटकी भर सिन्दूर,' 'अंतिम विदाई', 'अनछुआ प्यार' 'सहेली', 'बीस साल बाद' 'अपराध-बोध' आदि . देश-विदेश की हिंदी के पत्र -पत्रिकाओं,पुस्तकों तथा ई पत्रिकाओं में कविताएं तथा कहानियाँ प्रकाशित.विशेष रूप से इंगलैंड की 'पुरवाई' कनाडा के 'द हिंदी टाइम्स' व 'प्रयास ' तथा ऑस्ट्रेलिया के 'हिंदी गौरव' व 'हिंदी पुष्प' में बहुत सी कविताओं का प्रकाशन .'हिंद युग्म' द्वारा कई कविताएँ पुरुस्कृत. बच्चों के लिए नृत्य- नाटिकाओं का लेखन, निर्देशन तथा मंचन. कहानियों के नाटयीकरण ,साक्षात्कार,कॉन्सर्ट्स तथा स्टेज शो के लिए स्क्रिप्ट लेखन. हिंदी से अंग्रेज़ी तथा अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद कार्य-हिंदी से अंग्रेज़ी एक फिल्म का अनुवाद, 'टेम्स की सरगम ' हिंदी उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद, एक मराठी फिल्म 'स्पंदन' का हिंदी अनुवाद. जनवरी २०१४ में बाबा साहब अम्बेडकर नेशनल अवार्ड से देहली में सम्मानित. A special Issue of 'TSI, Hindi 111 Top Hindi Women Writers of 21st Century', published in August,2011, has included me in this issue as one of the top writers in 'The Sunday Indian' published in NOIDA Awards won: बाबा साहब अम्बेडकर नेशनल अवार्ड (दिल्ली) हिन्दी गौरव सम्मान (लंदन) प्रतिभा सम्मान (बीकानेर) सिद्धार्थ तथागत कला साहित्य सम्मान (सिद्धार्थ नगर) विदेश-भ्रमण -युनाइटेड किंगडम,ऑस्ट्रेलिया ,सिंगापुर तथा मालदीव्स. पता-बी,४०१/४०२,मधुबन अपार्टमेन्ट, फिशरीस युनीवरसिटी रोड, सात बंगला के पास,वर्सोवा,अंधेरी (पश्चिम),मुंबई-६१. Tel No-Mumbai Resi-022-26364228 Mobile Nos-(Mumbai) 09987490692 , 09987464198 E mail ID [email protected]

समीक्षा
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    Balkar Singh Goraya
    10 April 2019
    काश ... काश ... काश। यह क्यों होता है, मरने के बाद ? पुत्र अपने पिता से क्यों डरते हुए मां को घर लाने की बात नहीं कर सकता ? डर है केवल जायदाद। पिता बेदखल कर देगा। पुरुषों में नपुंसकता इस किस्म की भी होती है। स्त्री के किस रूप को इज्ज़त मिलती है ? केवल वह जो धन संपत्ति लेकर आये। सब पुरुषों की मां स्त्री ही होती है। फिर क्यों उपेक्षित है। भावुक होना व्यर्थ है, निरर्थक है।
  • author
    Pushpanjali Singh
    10 April 2019
    माँ की ममता से बढ़कर इस धरती पर कुछ और नहीं । अति मगमस्पर्शी कहानी
  • author
    ishwar dayal
    15 January 2022
    क्या नाम है जी आपका आपने तो मानो मेरे डूबते हुए प्राणों को सहारा दे दिया बहुत अच्छी लगी आपकी कविता मैं एक साहित्य प्रेमी हूं मैंने अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया है और मेरी मां का स्वर्गवास 13 वर्ष की अवस्था में हो गया था ऐसी कुछ कविता हृदय पर मलहम लगा देती है
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    Balkar Singh Goraya
    10 April 2019
    काश ... काश ... काश। यह क्यों होता है, मरने के बाद ? पुत्र अपने पिता से क्यों डरते हुए मां को घर लाने की बात नहीं कर सकता ? डर है केवल जायदाद। पिता बेदखल कर देगा। पुरुषों में नपुंसकता इस किस्म की भी होती है। स्त्री के किस रूप को इज्ज़त मिलती है ? केवल वह जो धन संपत्ति लेकर आये। सब पुरुषों की मां स्त्री ही होती है। फिर क्यों उपेक्षित है। भावुक होना व्यर्थ है, निरर्थक है।
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    Pushpanjali Singh
    10 April 2019
    माँ की ममता से बढ़कर इस धरती पर कुछ और नहीं । अति मगमस्पर्शी कहानी
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    ishwar dayal
    15 January 2022
    क्या नाम है जी आपका आपने तो मानो मेरे डूबते हुए प्राणों को सहारा दे दिया बहुत अच्छी लगी आपकी कविता मैं एक साहित्य प्रेमी हूं मैंने अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया है और मेरी मां का स्वर्गवास 13 वर्ष की अवस्था में हो गया था ऐसी कुछ कविता हृदय पर मलहम लगा देती है