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मालती के फूल

4.7
189

रात भर मुझे ठीक से नींद नहीं आयी, जगते सोते कब सुबह के अलार्म ने शोर मचा दिया पता ही नहीं चला। सात बज चुके थे ग्यारह बजे की ट्रेन थी। जल्दी जल्दी अपना बचा हुआ सामान भी पैक करने लगी। थोड़ी ही ...

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लेखक के बारे में
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Archana Srivastava

कुछ ख़ास नहीं हैं मुझमें, क्या कहकर अपनी पहचान दें। आपकी यादों का हिस्सा रहूँ, ख़ुदा मुझे बस इतनी रहमत दें।।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Preeti Tawri
    05 जुलाई 2021
    Aaj jaha Zindagi sirf Dosto or Maa-Pita tak seemit ho Gai h waha Ghar k sabhi Rishto ki importance....Rishtedaaro ki importance bahut hi sundar tarike se shabdo k taane baane se samjhane ka bharsak pryaas Sarahniya h👏👏👏👏
  • author
    Kalpana Srivastava
    28 जून 2021
    टूटते परिवार को बचाने के लिए मिसाल कायम करती एक मर्मस्पर्शी कहानी। हर शब्द और हर वाक्य में आत्मीयता।। बहुत बहुत बंधाई।
  • author
    पवन सिंह
    28 जून 2021
    पारिवारिक रिश्तों के ताने बाने पर आधारित एक बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकारें 👌🏼👏👏👏🌹🙏🙂सुप्रभात
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    Preeti Tawri
    05 जुलाई 2021
    Aaj jaha Zindagi sirf Dosto or Maa-Pita tak seemit ho Gai h waha Ghar k sabhi Rishto ki importance....Rishtedaaro ki importance bahut hi sundar tarike se shabdo k taane baane se samjhane ka bharsak pryaas Sarahniya h👏👏👏👏
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    Kalpana Srivastava
    28 जून 2021
    टूटते परिवार को बचाने के लिए मिसाल कायम करती एक मर्मस्पर्शी कहानी। हर शब्द और हर वाक्य में आत्मीयता।। बहुत बहुत बंधाई।
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    पवन सिंह
    28 जून 2021
    पारिवारिक रिश्तों के ताने बाने पर आधारित एक बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकारें 👌🏼👏👏👏🌹🙏🙂सुप्रभात