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मैंने वर्दी पहन ली

4.6
348

मैंने आज वर्दी पहन ली और छोड़ आया मोह को त्याग बैठा प्यार को कर गया अलहदा अपने धर्म को घर को अलविदा कह बनाया है ये नया बसेरा अब गोलियों की गूँज सुरमयी संगीत है रक्षा मेरा धर्म और हथियार मेरा साथी हाँ ...

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लेखक के बारे में
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विनायक शर्मा

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समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    23 जुलाई 2020
    kavita bahut khoob likhi
  • author
    Priya Pandey 🌱
    04 दिसम्बर 2020
    good
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    13 सितम्बर 2022
    सेना की वर्दी से सिविल वर्दी को प्रेरणा लेने की सीख देती प्रेरक रचना । हार्दिक साधुवाद
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    Manjit Singh
    23 जुलाई 2020
    kavita bahut khoob likhi
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    Priya Pandey 🌱
    04 दिसम्बर 2020
    good
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    अरविन्द सिन्हा
    13 सितम्बर 2022
    सेना की वर्दी से सिविल वर्दी को प्रेरणा लेने की सीख देती प्रेरक रचना । हार्दिक साधुवाद