तू चाहे चंचलता कह ले, तू चाहे दुर्बलता कह ले, दिल ने ज्यों ही मजबूर किया, मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा। यह प्यार दिए का तेल नहीं, दो चार घड़ी का खेल नहीं, यह तो कृपाण की धारा है, कोई गुड़ियों का खेल...
यह जो मेरी भीगी भीगी सी लिखावट है
स्याही में थोड़ी अश्कों की मिलावट है 💯💔🫂
भरोसा टूटा है मेरा वहम की दवाई मत दो...!
_____कही और जाकर शरीफ बनो ..........!
m....... मुझे सफाई मत दो.......? 💯❤️
सारांश
यह जो मेरी भीगी भीगी सी लिखावट है
स्याही में थोड़ी अश्कों की मिलावट है 💯💔🫂
भरोसा टूटा है मेरा वहम की दवाई मत दो...!
_____कही और जाकर शरीफ बनो ..........!
m....... मुझे सफाई मत दो.......? 💯❤️
रिपोर्ट की समस्या
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