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मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा। ❤️❤️❤️❤️❤️❤️

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तू चाहे चंचलता कह ले, तू चाहे दुर्बलता कह ले, दिल ने ज्यों ही मजबूर किया, मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा। यह प्यार दिए का तेल नहीं, दो चार घड़ी का खेल नहीं, यह तो कृपाण की धारा है, कोई गुड़ियों का खेल...

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लेखक के बारे में
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साकी.

यह जो मेरी भीगी भीगी सी लिखावट है स्याही में थोड़ी अश्कों की मिलावट है 💯💔🫂 भरोसा टूटा है मेरा वहम की दवाई मत दो...! _____कही और जाकर शरीफ बनो ..........! m....... मुझे सफाई मत दो.......? 💯❤️

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    🌹अमू😇☺️
    02 अक्टूबर 2023
    very nice
  • author
    Rekha Jain
    07 अगस्त 2023
    बहुत बहुत बहुत बहुत सुंदर रचना और खूबसूरत पंक्तियां 👌👌👌👌💐💐💐💐
  • author
    06 अगस्त 2023
    mind blowing 👌👌👌👌👌👌😍
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    🌹अमू😇☺️
    02 अक्टूबर 2023
    very nice
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    Rekha Jain
    07 अगस्त 2023
    बहुत बहुत बहुत बहुत सुंदर रचना और खूबसूरत पंक्तियां 👌👌👌👌💐💐💐💐
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    06 अगस्त 2023
    mind blowing 👌👌👌👌👌👌😍