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मैं स्त्री कहता हूँ

4.1
328

मैं स्त्री कहता हूँ.. तुम देह सोचते हो.. मैं देह कहता हूँ.. तुम विमर्श लेकर खड़े हो जाते हो.. पुरुष और परम्परा के हवाले के साथ.. दरअसल यह देह है क्या..? तुम्हारा ही रचा-गढ़ा प्रपंच ही तो है..? स्त्री ...

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लेखक के बारे में
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राकेश पाठक
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Pt Sharma
    29 जून 2019
    भाव पूर्ण रचना है।
  • author
    प्रवीण मन
    03 फ़रवरी 2018
    अच्छी रचना
  • author
    Vikash Kumar "Hasmukh"
    14 जून 2020
    karawa sach... ye kavita nahi mahilaaon ki karun yaatra hai...
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    Pt Sharma
    29 जून 2019
    भाव पूर्ण रचना है।
  • author
    प्रवीण मन
    03 फ़रवरी 2018
    अच्छी रचना
  • author
    Vikash Kumar "Hasmukh"
    14 जून 2020
    karawa sach... ye kavita nahi mahilaaon ki karun yaatra hai...