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मैं अर्जुन हूँ

4.4
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मैं अर्जुन हूँ, मुझे कृष्ण चहिए, रथ है, गांडीव भी, अस्त्रों से लैश हूँ, मुझे सारथी चहिए, सेनापति भीष्म खड़े सामने, इच्छामृत्यु की ढाल लिए, लिटाने को मृत्यु सय्या पर, शिखंडी का राज बता दे जो, ...

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लेखक के बारे में
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अमृत राज

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    12 मई 2020
    अंतर्द्वंद्व से ग्रस्त मन को मार्गदर्शक की तलाश हमेशा रहती है,किन्तु...कविता में पार्थ को अर्जुन से भिन्न व्यक्ति किस आधार पर कहा गया?
  • author
    प्रमोद सिंह
    28 जून 2020
    सुन्दर रचना है लेकिन पार्थ स्वयं अर्जुन है पृथा का पुत्र
  • author
    18 मार्च 2024
    वाह वाह वाह वाह वाह वाह बहुत खूब
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    12 मई 2020
    अंतर्द्वंद्व से ग्रस्त मन को मार्गदर्शक की तलाश हमेशा रहती है,किन्तु...कविता में पार्थ को अर्जुन से भिन्न व्यक्ति किस आधार पर कहा गया?
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    प्रमोद सिंह
    28 जून 2020
    सुन्दर रचना है लेकिन पार्थ स्वयं अर्जुन है पृथा का पुत्र
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    18 मार्च 2024
    वाह वाह वाह वाह वाह वाह बहुत खूब