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मैं फिरता हूँ अकेले बादल की तरह

3.8
455

मैं फिरता हूँ अकेले बादल की तरह विलीयम वर्ड्सवर्थ मैं फिरता हूँ अकेले बादल की तरह मै घाटियों और पहाड़ो में फिरता हूँ । फिर अचानक मुझे भीड़ दिखती है, सुनहरी नर्गिस के फूलों के झुँड की झील के किनारे, ...

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लेखक के बारे में
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बीनू भटनागर
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    23 ஏப்ரல் 2022
    जी ये कविता मैने आठवीं कक्षा में पढ़ी थी,शीर्षक था Daffodils, पुरानी याद ताजा कर दी शुक्रिया,खूबसूरत अनुवाद
  • author
    Madhu Vashishta "लेखक"
    16 செப்டம்பர் 2019
    वाह बहुत सुंदर
  • author
    રામ ગઢવી
    21 ஜூலை 2017
    sundar kavita
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  • author
    Manjit Singh
    23 ஏப்ரல் 2022
    जी ये कविता मैने आठवीं कक्षा में पढ़ी थी,शीर्षक था Daffodils, पुरानी याद ताजा कर दी शुक्रिया,खूबसूरत अनुवाद
  • author
    Madhu Vashishta "लेखक"
    16 செப்டம்பர் 2019
    वाह बहुत सुंदर
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    રામ ગઢવી
    21 ஜூலை 2017
    sundar kavita