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मैं चुपचाप होती हूँ

4.3
814

मैं चुपचाप होती हूँ तब अपने से बातें करती रहती हूँ , पर वो कौन है ? इक अनजानी सी फिर भी जानी पहचानी सी, मुझमें और उसमें दूरी है पर काफी नज़दीकी भी, इक परछाईं सी, मुझमें लिपटी हुई सी, वो कौन है , कैसी ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    ભારતી વડેરા
    13 अक्टूबर 2015
    Very nice poem 
  • author
    Singhh Pams "Singhh Pams"
    25 अगस्त 2024
    बहुत ही सुन्दर भावनाओं और विचारों को दर्शातीं हुईं लाजवाब रचना है आपकी ऐसे ही लिखते रहिए 🍂🪷🪷🌻🪷🏵️🪷🪷🌻🌻🙏🙏🙏🙏🙏🙏💯
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का पूर्ण ध्यान देती , अत्यंत सारयुक्त व प्रासंगिक कविता ।
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    ભારતી વડેરા
    13 अक्टूबर 2015
    Very nice poem 
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    Singhh Pams "Singhh Pams"
    25 अगस्त 2024
    बहुत ही सुन्दर भावनाओं और विचारों को दर्शातीं हुईं लाजवाब रचना है आपकी ऐसे ही लिखते रहिए 🍂🪷🪷🌻🪷🏵️🪷🪷🌻🌻🙏🙏🙏🙏🙏🙏💯
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    17 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का पूर्ण ध्यान देती , अत्यंत सारयुक्त व प्रासंगिक कविता ।