"अंजू, जरा तो सीख ले बेटा कि किस सब्जी में क्या डालते हैं नहीं तो तेरे ससुराल वाले कहेंगे कुछ सिखाया नहीं माँ ने, बस भेज दिया।"-माँ अपनी बात कहे जा रही थी और अंजू आँखें बंद किए आराम से लौकी के ...
वाराणसी मेरी जन्मस्थली और पुणे मेरी कर्मस्थली है।हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए और एम. एड. किया है । कविताएंँ, कहानियाँ, नाटक, संस्मरण, गीत लिखना और किताबें पढ़ना मुझे पसंद है। छोटी कहानियाँ लिखना और पढ़ना अधिक पसंद है। एक शिक्षिका हूँ। बच्चों से बेहद प्यार करती हूँ और देश के भविष्य को एक सही दिशा देने में प्रयासरत हूँ।
सारांश
वाराणसी मेरी जन्मस्थली और पुणे मेरी कर्मस्थली है।हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए और एम. एड. किया है । कविताएंँ, कहानियाँ, नाटक, संस्मरण, गीत लिखना और किताबें पढ़ना मुझे पसंद है। छोटी कहानियाँ लिखना और पढ़ना अधिक पसंद है। एक शिक्षिका हूँ। बच्चों से बेहद प्यार करती हूँ और देश के भविष्य को एक सही दिशा देने में प्रयासरत हूँ।
सही कहा विभा जी ------मां के हाथ के बनाए हुए खाने का स्वाद कैसे कोई भुला सकता है!!!!!! उस खाने में मां का लाड़ दुलार भी तो शामिल होता है -----👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍❤❤❤❤❤
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सही कहा विभा जी ------मां के हाथ के बनाए हुए खाने का स्वाद कैसे कोई भुला सकता है!!!!!! उस खाने में मां का लाड़ दुलार भी तो शामिल होता है -----👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍❤❤❤❤❤
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