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माँ के हाथ का खाना

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"अंजू,  जरा तो सीख ले बेटा कि किस सब्जी में क्या डालते हैं नहीं तो तेरे ससुराल वाले कहेंगे कुछ सिखाया नहीं माँ ने, बस भेज दिया।"-माँ अपनी बात कहे जा रही थी और अंजू आँखें बंद किए आराम से लौकी के ...

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लेखक के बारे में
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vibha pandey

वाराणसी मेरी जन्मस्थली और पुणे मेरी कर्मस्थली है।हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए और एम. एड. किया है । कविताएंँ, कहानियाँ, नाटक, संस्मरण, गीत लिखना और किताबें पढ़ना मुझे पसंद है। छोटी कहानियाँ लिखना और पढ़ना अधिक पसंद है। एक शिक्षिका हूँ। बच्चों से बेहद प्यार करती हूँ और देश के भविष्य को एक सही दिशा देने में प्रयासरत हूँ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sulekha Chatterjee
    10 जून 2021
    सही कहा विभा जी ------मां के हाथ के बनाए हुए खाने का स्वाद कैसे कोई भुला सकता है!!!!!! उस खाने में मां का लाड़ दुलार भी तो शामिल होता है -----👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍❤❤❤❤❤
  • author
    Madhu Sethi
    10 जून 2021
    बहुत बढ़िया हृदय स्पर्शी कहानी सुंदर अभिव्यक्ति
  • author
    Sharmila Naithani Sharma
    11 जून 2021
    अंजू की कहानी हर बेटी की कहानी है।
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    Sulekha Chatterjee
    10 जून 2021
    सही कहा विभा जी ------मां के हाथ के बनाए हुए खाने का स्वाद कैसे कोई भुला सकता है!!!!!! उस खाने में मां का लाड़ दुलार भी तो शामिल होता है -----👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍❤❤❤❤❤
  • author
    Madhu Sethi
    10 जून 2021
    बहुत बढ़िया हृदय स्पर्शी कहानी सुंदर अभिव्यक्ति
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    Sharmila Naithani Sharma
    11 जून 2021
    अंजू की कहानी हर बेटी की कहानी है।