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माँ का फ़र्ज़

4.5
27999

गाँव में चौराहे पर खचाखच भीड़ लगी थी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया ? कैसे हो गया ? कुछ लोग सहमे थे, कुछ मन-ही-मन चिंतित, तो कुछ लोग सोच रहे थे, चलो अच्छा हुआ, भगवान का शायद यही फैसला ...

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लेखक के बारे में
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Sudha Sharma
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shaline Gupta
    19 ఆగస్టు 2019
    मां की कठिन परीक्षा थी।बेटे को चुने या देश को।अच्छी कहानी है।
  • author
    Urmil Nayyar
    22 జులై 2021
    एक उम्दा बेहतरीन रचना है। एक माँ का समाज की खातिर जगतजननी माँ दुर्गा रूप ले लेना,अत्यंत मार्मिक है पर अत्यधिक प्रभावित करता है। रचना के लिए साधुवाद
  • author
    Vimal Singh Rajput
    19 అక్టోబరు 2019
    ममता की कुर्बानी .. समाज और देश को बचाने के लिए ताकी कोई और दुःखीया पैदा ना हो
  • author
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    Shaline Gupta
    19 ఆగస్టు 2019
    मां की कठिन परीक्षा थी।बेटे को चुने या देश को।अच्छी कहानी है।
  • author
    Urmil Nayyar
    22 జులై 2021
    एक उम्दा बेहतरीन रचना है। एक माँ का समाज की खातिर जगतजननी माँ दुर्गा रूप ले लेना,अत्यंत मार्मिक है पर अत्यधिक प्रभावित करता है। रचना के लिए साधुवाद
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    Vimal Singh Rajput
    19 అక్టోబరు 2019
    ममता की कुर्बानी .. समाज और देश को बचाने के लिए ताकी कोई और दुःखीया पैदा ना हो