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माँ का आँचल

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जो  अमृत की बूंद  पिलाती है , बरसाती  है  करुणा के बादल । ममता की सागर  छलकाती है , वह  मां का प्यारा  है  आंचल ।। नन्हें -  नन्हें   पौधों   को   जो , नेह - वारि   से  सदा  सिंचती । दुख के आतप में ...

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लेखक के बारे में
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रमेश तिवारी

मैं गुमनाम कवि हूँ गाँवों का , मेरी कविता कौन ? पढ़ेगा । सहज जाल शब्दों का बुनता , इन जालों में कौन फसेंगा । हमें कौन स्नेह प्रेम दे , अपनों में देगा सम्मान ! नहीं मुझे है इसकी चिन्ता , न खुद पर है अभिमान | मेरा परिचय तुमसे कैसा , मैं हूँ मानव तेरे जैसा , बस मानवता पथ है मेरा , यह पथ बोलो कौन बढ़ेगा ।। 🖋रमेश तिवारी लल्लन गुलालपुरी दरियापुर उर्फ़ गुलालपुर,सहसों, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत " आधुनिक युग का तुलसी "

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Krishna Shukla
    15 अप्रैल 2023
    सत्य माँ जैसा प्रेमी धीर हृदय दूजा नहीं बहुत सुन्दर सृजन 🌹🙏👌👍
  • author
    DurgeshWari Sharma🚩
    05 अगस्त 2023
    रमेश जी आपका लेखन बहुत अच्छा है बहुत सुंदर कविता लिखते हैं आप आपकीी प्रतिभा को नमन है
  • author
    Meenakshi Shrivastava "Nirmal sneha"
    26 मई 2024
    bahut sunder
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Krishna Shukla
    15 अप्रैल 2023
    सत्य माँ जैसा प्रेमी धीर हृदय दूजा नहीं बहुत सुन्दर सृजन 🌹🙏👌👍
  • author
    DurgeshWari Sharma🚩
    05 अगस्त 2023
    रमेश जी आपका लेखन बहुत अच्छा है बहुत सुंदर कविता लिखते हैं आप आपकीी प्रतिभा को नमन है
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    Meenakshi Shrivastava "Nirmal sneha"
    26 मई 2024
    bahut sunder