कभी लिखी थी यह आराधना आज याद आ गयी
तुम शिवा भी हो
तुम धात्री भी
तुम क्षमा भी हो
तुम कालरात्री भी
हम नतमस्तक तुम्हे ध्यावे
तुम रूप भी हो
तुम जय भी
तुम यश भी
तुम पराजय भी
हम नतमस्तक तुम्हे ध्यावे
तुम ...
नीलिमा शर्मा
कोई ख़ुशबू उदास करती है कहानी संग्रह की लेखिका ,मुट्ठी भर अक्षर,खुसरो दरिया प्रेम का , आईना सच नही बोलता हाशिये का हक़ ,मूड्स ऑफ लॉक डाउन , लुका छिपी, मृगतृष्णा की संपादक ओर लेखक
सारांश
नीलिमा शर्मा
कोई ख़ुशबू उदास करती है कहानी संग्रह की लेखिका ,मुट्ठी भर अक्षर,खुसरो दरिया प्रेम का , आईना सच नही बोलता हाशिये का हक़ ,मूड्स ऑफ लॉक डाउन , लुका छिपी, मृगतृष्णा की संपादक ओर लेखक
रिपोर्ट की समस्या
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