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लौट आओ किरन

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बाय दादाजी, बाय बेटा। अंकुर और उसके परिवार को एयरपोर्ट पर छोड़कर जब मैं वापस लौटा तो सुबह के 8 बज गए थे। अंकुर मेरा बेटा, 2 साल से लन्दन में नौकरी कर रहा है। साल में 1 बार आता है। वो , उसकी पत्नी और ...

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    Vivek Malik
    19 सितम्बर 2020
    ओह्ह.. दिल मे एक हूक सी उठी... यह कहनी अंदर तक कचोट गई... वाकई हम पुरुष कई बार अपने काम मे इतने व्यस्त हो जाते हैँ अपनों का ध्यान ही नही रख पाते... (हालांकि कई बार मैं भी अपने काम मे इतना व्यस्त हो जाता हूँ कि पत्नी की तबियत खराब होने पर फ़ोन पर भी उसका हाल चाल नहीं पूछ पाता और मेरी पत्नी ने कभी भी इस बात को शिकायत नही की).. 24 अगस्त को मैंने अपना कोरोना का टेस्ट करवाया और मैं कोरोना संक्रमित पाया गया.. मैं 5 दिन घर पर आइसोलेट रहा उसके बाद तबियत बिगड़ने पर 28 @ अगस्त को अस्पताल मे भर्ती होना पड़ा.. 29 अगस्त को मेरी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव हो गई.. इसी बीच उसने मेरी दीदी और जीजाजी से बात की जो कि एक शहर के जानेमाने डॉक्टर हैँ.. उन्होंने अपने लिंक से मेरी पत्नी को मेरे वाले हॉस्पिटल और यहाँ तक कि मेरे वाले ही वार्ड मे भर्ती करवा दिया... पूरे 2 हफ्ते वह मेरे आस पास ही रही.. मेरी दवाइयां.. मेरा ऑक्सीजन लेवल चेक करना.. इत्यादि वह सुचारु रूप से करती रही.. इसी बीच मुझे 3 दिन के लिए ICU मे भी जाना पड़ा.. वो 3 दिन मेरी पत्नी के आंसू थमने का नाम नही ले रहे थे.. चुंकि जीजाजी के लिंक की वजह से हम दोनों VIP पेशेंट की तरह ट्रीट किये जा रहे थे.. डॉक्टर्स मुझे मेरी पत्नी की एक एक बात बता रहे थे.. मैंने इस बात का जिक्र इसलिए किया क्युकी मेरी पत्नी एक नामी FM चैनल के लिए फ्री लान्सिंग सर्विस करती है और वह भी अपने काम मे बहुत व्यस्त रहती है लेकिन मेरी तबियत जरा सी भी ख़राब हो तो पूरा दिन फ़ोन पर मेरा हाल चाल लेती रहती है... और एक मैं हूँ.. अब जब हम दोनों ठीक होकर घर वापस आ गए हैँ.. मुझे अहसास होता है कि मैं कितना गलत करता हूँ... काम मे इतना भी क्या व्यस्त होना कि मैं अपनी पत्नी का फ़ोन पर उसका हाल चाल भी नही लेता.. मैंने अपनी पत्नी से इस बात के लिए माफ़ी मांगी और कोशिश करूंगा कि इस तरह की गलती दोबारा ना हो)
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    रश्मि सिंह
    29 अक्टूबर 2017
    nice story. aksar log yahi karte hain. waqt pe ahsas nahi hota aur jab ahsas hota hai tab waqt nahi hota.
  • author
    20 अक्टूबर 2017
    kya fayda aise samay ka jo samay rahte na samajh paye. nice story
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    Vivek Malik
    19 सितम्बर 2020
    ओह्ह.. दिल मे एक हूक सी उठी... यह कहनी अंदर तक कचोट गई... वाकई हम पुरुष कई बार अपने काम मे इतने व्यस्त हो जाते हैँ अपनों का ध्यान ही नही रख पाते... (हालांकि कई बार मैं भी अपने काम मे इतना व्यस्त हो जाता हूँ कि पत्नी की तबियत खराब होने पर फ़ोन पर भी उसका हाल चाल नहीं पूछ पाता और मेरी पत्नी ने कभी भी इस बात को शिकायत नही की).. 24 अगस्त को मैंने अपना कोरोना का टेस्ट करवाया और मैं कोरोना संक्रमित पाया गया.. मैं 5 दिन घर पर आइसोलेट रहा उसके बाद तबियत बिगड़ने पर 28 @ अगस्त को अस्पताल मे भर्ती होना पड़ा.. 29 अगस्त को मेरी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव हो गई.. इसी बीच उसने मेरी दीदी और जीजाजी से बात की जो कि एक शहर के जानेमाने डॉक्टर हैँ.. उन्होंने अपने लिंक से मेरी पत्नी को मेरे वाले हॉस्पिटल और यहाँ तक कि मेरे वाले ही वार्ड मे भर्ती करवा दिया... पूरे 2 हफ्ते वह मेरे आस पास ही रही.. मेरी दवाइयां.. मेरा ऑक्सीजन लेवल चेक करना.. इत्यादि वह सुचारु रूप से करती रही.. इसी बीच मुझे 3 दिन के लिए ICU मे भी जाना पड़ा.. वो 3 दिन मेरी पत्नी के आंसू थमने का नाम नही ले रहे थे.. चुंकि जीजाजी के लिंक की वजह से हम दोनों VIP पेशेंट की तरह ट्रीट किये जा रहे थे.. डॉक्टर्स मुझे मेरी पत्नी की एक एक बात बता रहे थे.. मैंने इस बात का जिक्र इसलिए किया क्युकी मेरी पत्नी एक नामी FM चैनल के लिए फ्री लान्सिंग सर्विस करती है और वह भी अपने काम मे बहुत व्यस्त रहती है लेकिन मेरी तबियत जरा सी भी ख़राब हो तो पूरा दिन फ़ोन पर मेरा हाल चाल लेती रहती है... और एक मैं हूँ.. अब जब हम दोनों ठीक होकर घर वापस आ गए हैँ.. मुझे अहसास होता है कि मैं कितना गलत करता हूँ... काम मे इतना भी क्या व्यस्त होना कि मैं अपनी पत्नी का फ़ोन पर उसका हाल चाल भी नही लेता.. मैंने अपनी पत्नी से इस बात के लिए माफ़ी मांगी और कोशिश करूंगा कि इस तरह की गलती दोबारा ना हो)
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    रश्मि सिंह
    29 अक्टूबर 2017
    nice story. aksar log yahi karte hain. waqt pe ahsas nahi hota aur jab ahsas hota hai tab waqt nahi hota.
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    20 अक्टूबर 2017
    kya fayda aise samay ka jo samay rahte na samajh paye. nice story