पुस्तक के अंत में लिखा वो नाम गुमनाम को तब तक याद रहा जब तक उसकी आखिरी साँस साथ थी। आज उसकी मृत्यू के ४ (4) साल बाद भी वह पुस्तक अलमारी में ठीक उसी तरह पुराने जिल्द में लिप्टी हुई मानो उसी (गुमनाम)...

प्रतिलिपिपुस्तक के अंत में लिखा वो नाम गुमनाम को तब तक याद रहा जब तक उसकी आखिरी साँस साथ थी। आज उसकी मृत्यू के ४ (4) साल बाद भी वह पुस्तक अलमारी में ठीक उसी तरह पुराने जिल्द में लिप्टी हुई मानो उसी (गुमनाम)...