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पुस्तक का अंतिम पन्ना

चाहतlast page of book
170
4.5

पुस्तक के अंत में लिखा वो नाम गुमनाम को तब तक याद रहा जब तक उसकी आखिरी साँस साथ थी। आज उसकी मृत्यू के ४ (4) साल बाद भी वह पुस्तक अलमारी में ठीक उसी तरह पुराने जिल्द में लिप्टी हुई मानो उसी (गुमनाम)...