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लम्हे

4.4
432

बहते हुए इन लम्हों को कौन रोक पाता है, रेत की तरह फिसलता हुआ ये वक़्त हाथों से छूट जाता है। तो क्या हुआ की गर् न रोक पाये इन बहते लम्हों को, थाम लेना बहते लम्हों को हमें भी खूब आता है। और सिर्फ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vikkey Uikey
    14 August 2019
    बहुत ही बेहतरीन , भावनात्मकता रूप से लिखा है।।
  • author
    Ruby Mandal
    29 June 2020
    बहुत ही सुन्दर लिखा है
  • author
    Anand Singh
    09 September 2018
    nice and heart touch poem
  • author
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  • author
    Vikkey Uikey
    14 August 2019
    बहुत ही बेहतरीन , भावनात्मकता रूप से लिखा है।।
  • author
    Ruby Mandal
    29 June 2020
    बहुत ही सुन्दर लिखा है
  • author
    Anand Singh
    09 September 2018
    nice and heart touch poem