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लघुकथा - गेम

4.4
11393

उस दिन प्रिया की आँखें आँसुओं से तर थीं । बोली-"संजय, क्या मैं सिर्फ इसलिए नौकरी छोड़ दूँ कि तुम मुझ पर शक करते हो ?" "पर तुम्हें नौकरी करने की जरूरत भी क्या है, मैं तो कमाता ही हूँ ।" वह झल्ला उठा...

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लेखक के बारे में
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मुन्नू लाल

लेखक-परिचय नाम-मुन्नू लाल जन्मतिथि- 15 मार्च,1970 सम्प्रति- अध्यापक, बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रकाशन- शुभतारिका, झंकृति, सामाजिक आक्रोश, नन्दन, चम्पक, नन्हे सम्राट, अट्ठहास इत्यादि पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथाएँ, कहानियाँ, बाल कहानियाँ व व्यंग्य प्रकाशित पुरस्कार- राज्य संसाधन केन्द्र, लखनऊ (उ.प्र.) द्वारा 2001 में आयोजित नवसाक्षर साहित्य लेखन प्रतियोगिता में दो प्रविष्टियाँ पुरस्कृत व पुस्तिकाकार प्रकाशित संपर्क- ग्राम-पुरूषोत्तमपुर, पोस्ट-सोनपुर, वाया गैसड़ी, जिला- बलरामपुर-271210 (उत्तर प्रदेश

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Meera Sajwan "मानवी"
    19 സെപ്റ്റംബര്‍ 2018
    जब अपने हीअपनो पर विश्वास नहीं करते तो बाहर के लोग ऐसे ही फायदा उठाते हैं। पति-पत्नी के रिश्ते की डोर विश्वास पर ही निर्भर होती है, बिना सत्य को जाने दोषारोपण के ऐसे ही नुकसान उठाना पड़ता है।
  • author
    Ram Lohar
    25 ഡിസംബര്‍ 2018
    शब्दों से उकेरी गयी समाज की मानसिकता।
  • author
    Sappna sharma
    22 നവംബര്‍ 2018
    sahi likha sir office ki gandi rajneeti
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    Meera Sajwan "मानवी"
    19 സെപ്റ്റംബര്‍ 2018
    जब अपने हीअपनो पर विश्वास नहीं करते तो बाहर के लोग ऐसे ही फायदा उठाते हैं। पति-पत्नी के रिश्ते की डोर विश्वास पर ही निर्भर होती है, बिना सत्य को जाने दोषारोपण के ऐसे ही नुकसान उठाना पड़ता है।
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    Ram Lohar
    25 ഡിസംബര്‍ 2018
    शब्दों से उकेरी गयी समाज की मानसिकता।
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    Sappna sharma
    22 നവംബര്‍ 2018
    sahi likha sir office ki gandi rajneeti