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लगन

3.7
1622

रामू एक गांव में रहता है। उसके परिवार की माली हालत ठीक नही थी वह बहुत गरीब था पढ़ लिखकर वह बड़ा आदमी बनना चाहता था और अपने माता पिता के लिए कुछ करना चाहता था।उसके पिता जी ने उसका दाखिला गांव के ...

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लेखक के बारे में

अपनी ही दुनियाँ में मस्त अपनी ही पहचान की तलाश में निकली बस मंजिल की तलाश है

समीक्षा
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  • author
    Aditya Dubay
    27 मार्च 2021
    व्याकरणगत अशुद्धि तो हैं ही कहानी में साथ ही मैट्रिक पास करते ही शिक्षक?? अतिश्योक्ति...
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    Aditya Dubay
    27 मार्च 2021
    व्याकरणगत अशुद्धि तो हैं ही कहानी में साथ ही मैट्रिक पास करते ही शिक्षक?? अतिश्योक्ति...