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कभी हम भी चटक लाल थे किसी का ख्वाब थे

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उम्र के इस दहलीज पर यादों के पन्नों के बीच हम एक सूखे फूल से बनकर रह गए हैं कभी हम भी चटक लाल रंग के थे किसी डाली पर हमारा भी आशियाना था हमारे साथ के हजारों गुलाब से पर धीरे किसी ने तोड़ कर अपनी ...

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लेखक के बारे में
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Upma Saxena

मै शिक्षा के क्षेत्र से संबद्ध हूँ। मै वक्त के उस हिस्से से हूँ जब मनोरंजन के लिए सिर्फ किस्से कहानियां होती थी।किताबे परियों के देश ले जाती थी।सस्ती रूसी किताबे थी।हर घर मे अपना पुस्तकालय होता था।आस पास चलती फिरती कहानियाँ देखते थे ।झूठे सच्चे किस्से सुनते थे।कहानियों की दुनिया मे रहना चाहती हूँ। प्रतिलिपि का आभार कि उसने मुझे मेरी कहानियों की दुनिया दे दी।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dinesh Kumar
    14 जुलाई 2023
    खूबसूरत
  • author
    Raj Kamra
    14 जुलाई 2023
    क्या बात है... उपमा बहन... भूतकाल का वो लाल गुलाब .. यादों के पन्नों में सुर्ख लाल न सही... लेकिन खुश्बू से समझौता नहीं किया.... तभी तो आपने इस पन्ने को खोला और वो सुर्ख लाल गुलाब की खुश्बू मुझ तक आ पहुंची.... 🌹🌹 😍👏👌👍🌹🌹🌹🌹🌹🌹
  • author
    jayshankar prasad
    14 जुलाई 2023
    बेहतरीन एवं लाजबाव अनुभूति को दर्शाती आपकी भावाभिव्यक्ति है
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  • कुल टिप्पणी
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    Dinesh Kumar
    14 जुलाई 2023
    खूबसूरत
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    Raj Kamra
    14 जुलाई 2023
    क्या बात है... उपमा बहन... भूतकाल का वो लाल गुलाब .. यादों के पन्नों में सुर्ख लाल न सही... लेकिन खुश्बू से समझौता नहीं किया.... तभी तो आपने इस पन्ने को खोला और वो सुर्ख लाल गुलाब की खुश्बू मुझ तक आ पहुंची.... 🌹🌹 😍👏👌👍🌹🌹🌹🌹🌹🌹
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    jayshankar prasad
    14 जुलाई 2023
    बेहतरीन एवं लाजबाव अनुभूति को दर्शाती आपकी भावाभिव्यक्ति है