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क्या हम दोस्त बन सकते हैं

4.1
94

बेखयाली में बस खयाल का हीं ज़िक्र रहता है , यह ज़िक्र भी क्या खूब रहता है , आँखें एक ख्वाब बुनती हैं , जिसमें पलकें तेरी हीं होती हैं .. "

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एक अनोखी कहानी

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    ऋषिनाथ झा
    03 अगस्त 2019
    बहुत सुन्दर रचना अछि
  • author
    Bhanu Pratap Pratap
    16 अगस्त 2018
    gjb
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    ऋषिनाथ झा
    03 अगस्त 2019
    बहुत सुन्दर रचना अछि
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    Bhanu Pratap Pratap
    16 अगस्त 2018
    gjb