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कुलधरा में एक रात

4.5
754

निशिकांत जब अपने घर पहुंचा तब उसके अन्य दोनों मित्र सुलभ और कौस्तुभ अपनी पत्नियों के साथ उसके घर पर मौजूद थे। खुद उसकी पत्नी शुचि किचन में चाय नाश्ता तैयार करने में लगी थी। निशिकांत ने सभी का ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    पवनेश मिश्रा
    10 मई 2020
    कुलधरा का खौफनाक राज विषय पर आपकी लेखनी ने जादुई कथानक लिखा है दीपक जी, कथानक को एक बार में पढ़ना शुरू करने के बाद तब ठहर पाए जब कथानक पूर्ण हुआ, हॉरर विषय पर आपकी सशक्त लेखनी, और सिद्धहस्त सृजन क्षमता, से परिचित होकर, अत्यंत आनंद आया, अनंत शुभकामनाएं एवं विश्व मातृ दिवस पर बहुत बहुत बधाई 🙏🌹🙏,
  • author
    Kavita Chaudhary "Chandni"
    21 मार्च 2022
    क्या कुलधरा की आत्माएं ये नहीं जानती कि बाहर से आने वाले मेहमान होते हैं । उनका खाना नहीं छीना जाता
  • author
    Vijaykant Verma
    10 मई 2020
    गजब की कहानी लिखी है आपने। पुरस्कार हेतु बधाई
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    पवनेश मिश्रा
    10 मई 2020
    कुलधरा का खौफनाक राज विषय पर आपकी लेखनी ने जादुई कथानक लिखा है दीपक जी, कथानक को एक बार में पढ़ना शुरू करने के बाद तब ठहर पाए जब कथानक पूर्ण हुआ, हॉरर विषय पर आपकी सशक्त लेखनी, और सिद्धहस्त सृजन क्षमता, से परिचित होकर, अत्यंत आनंद आया, अनंत शुभकामनाएं एवं विश्व मातृ दिवस पर बहुत बहुत बधाई 🙏🌹🙏,
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    Kavita Chaudhary "Chandni"
    21 मार्च 2022
    क्या कुलधरा की आत्माएं ये नहीं जानती कि बाहर से आने वाले मेहमान होते हैं । उनका खाना नहीं छीना जाता
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    Vijaykant Verma
    10 मई 2020
    गजब की कहानी लिखी है आपने। पुरस्कार हेतु बधाई