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कुलदेवता के वृक्ष के पत्ते

4.4
8067

कहानी मौर्य वंश के सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध से सम्बन्धित है। कहानी में सम्राट के बचपन की एक विचित्र घटना दिखायी गयी है। जिसके फलस्वरूप कलिंग युद्ध के दौरान उनके ह्रदय में महान परिवर्तन हो जाता ...

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लेखक के बारे में
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नवनीत कुमार

यूं तो 'शून्य' हो जाऊं पर, दिखावा किस कदर त्याग दूं? "मैं" अगर "मैं" न बनूंगा? तो तू पहचानेगा कैसे?? सहायक अध्यापक (बेसिक शिक्षा परिषद, उ.प्र.), बी.एस.सी.(भौतिक,रसायन,गणित), बी.टी.सी., एम.ए.(हिन्दी) , यू.जी.सी. जे.आर.एफ (हिन्दी)

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    23 दिसम्बर 2019
    मित्रवर श्री नवनीत कुमार जी बहुत-बहुत बधाई और साधुवाद। प्राचीन काल में बहुत सी बातें संकेत में कह दी जाती थी जिनके गूढ रहस्य समझकर आने वाली पीढी अपने भविष्य का निर्धारण करते थे। किंतु आज न वैसे विद्वान बुजुर्ग है और न ही वैसे उनके उत्तराधिकारी।आपने इतिहास का एक रहस्य पाठकों से साझा किया,उसके लिए बधाई।
  • author
    Chhaya Srivastava
    24 जनवरी 2018
    कहानी अच्छी लगी।हमारे कर्म ही हमारी आने वाली पीढ़ी को संस्कारी बनाते है
  • author
    Beena Awasthi
    07 अगस्त 2019
    आज लोगों के मन से यह डर निकल गया है कि हमारे कर्मो का फल हमें भुगतना ही है और जैसे हम उत्तराधिकार में धन और सम्पत्ति देते हैं उसी तरह अपने कर्म और पाप.भी अगली पीढ़ी को देकर जाते हैं। इसी तथ्य को याद दिलाती एक बेहतरीन कहानी।
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    23 दिसम्बर 2019
    मित्रवर श्री नवनीत कुमार जी बहुत-बहुत बधाई और साधुवाद। प्राचीन काल में बहुत सी बातें संकेत में कह दी जाती थी जिनके गूढ रहस्य समझकर आने वाली पीढी अपने भविष्य का निर्धारण करते थे। किंतु आज न वैसे विद्वान बुजुर्ग है और न ही वैसे उनके उत्तराधिकारी।आपने इतिहास का एक रहस्य पाठकों से साझा किया,उसके लिए बधाई।
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    Chhaya Srivastava
    24 जनवरी 2018
    कहानी अच्छी लगी।हमारे कर्म ही हमारी आने वाली पीढ़ी को संस्कारी बनाते है
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    Beena Awasthi
    07 अगस्त 2019
    आज लोगों के मन से यह डर निकल गया है कि हमारे कर्मो का फल हमें भुगतना ही है और जैसे हम उत्तराधिकार में धन और सम्पत्ति देते हैं उसी तरह अपने कर्म और पाप.भी अगली पीढ़ी को देकर जाते हैं। इसी तथ्य को याद दिलाती एक बेहतरीन कहानी।