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कुएं का मेंढक

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तेरे बिन सब अंधेरा है कुंए में गिरे मेंढक की टर-टर कौन सुने जालिम दुनिया वाले झांक सब जाते  हैं हंस कर टाल देते हैं रस्सी कोई नहीं लटकाता अशोक कंसल © 22 जुलाई 22 ...

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लेखक के बारे में
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Ashok Kansal

Nothing to show.Writing is not my profession it has become my hobby & passion .

समीक्षा
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  • author
    Ritu Goel
    22 जुलाई 2022
    यथार्थ चित्रण करती अति उत्तम सार्थक प्रस्तुति
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    22 जुलाई 2022
    बिल्कुल सही।। ऐसा ही होता है आजकल!!
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    Ritu Goel
    22 जुलाई 2022
    यथार्थ चित्रण करती अति उत्तम सार्थक प्रस्तुति
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    22 जुलाई 2022
    बिल्कुल सही।। ऐसा ही होता है आजकल!!