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क्षणिकाएंँ

3.9
448

कविता भावों की बहती कल- कल करती सरिता है .....कविता पर क्षणिकाएँ ........

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लेखक के बारे में
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वीना सिंह

स्वतंत्र लेखिका प्रकाशन - शोध ग्रंथ - लोक साहित्य, विभिन्न हिंदी पाठ्य पुस्तकें,, व्याकरण कक्षा १-८, 7 साझा काव्य संकलन , 7 साझा लघु कथा संग्रह लेख आदि प्रकाशन- भाषा भारती, नवपल्लव , शब्द सुमन , सिनर्जी ,हरि गंधा, हिमालिनी, जगमगदीप ज्योति, मधु संबोध, साहित्य कलश आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख, कहानियाँ, कविताएँ आदि सम्मान- विविन्न संस्थाओं द्वारा साहित्य सेवा व हिंदी सेवा सम्मान आदि.आदर्श राष्ट्रभाषा शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्र रत्न सम्मान, श्रेष्ठ लघुकथाकार सम्मान आदि|

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rishiraj Verma
    17 मई 2018
    अद्भुत रचना... कृपया एक बार मेरी कविताएँ भी पढ़कर अपने सुझाव देने की कृपा करें। 🙏🙏
  • author
    विकास कुमार
    13 मार्च 2018
    अदभुद
  • author
    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
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    Rishiraj Verma
    17 मई 2018
    अद्भुत रचना... कृपया एक बार मेरी कविताएँ भी पढ़कर अपने सुझाव देने की कृपा करें। 🙏🙏
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    विकास कुमार
    13 मार्च 2018
    अदभुद
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    Naveen Pawar
    22 जनवरी 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है