रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ साथ मैं एक भाई के तरफ से एक बहन के लिए एक रक्षा वचन लिखने की कोशिश किया हूँ, आप सब बताएँ कि मेरी कोशिश कैसी है?
आज दुःशासन है ,फैला चहुँ ओर ...., उठने ना ...
मत पुछ इस पंछी से कहाँ जाना है,
पंख पसार उड़ चले हैं, इस उन्मुक्त गगन में,
जहां दिन ढल जाये, बस वहीं ठिकाना है।
कल आज और कल की फिकर क्यों हो हमे,
जब अपनी खिदमत् करता सारा जमाना है ।
सारांश
मत पुछ इस पंछी से कहाँ जाना है,
पंख पसार उड़ चले हैं, इस उन्मुक्त गगन में,
जहां दिन ढल जाये, बस वहीं ठिकाना है।
कल आज और कल की फिकर क्यों हो हमे,
जब अपनी खिदमत् करता सारा जमाना है ।
रिपोर्ट की समस्या
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