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कृष्ण का रक्षावचन

4.5
480

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ साथ मैं एक भाई के तरफ से एक बहन के लिए एक रक्षा वचन लिखने की कोशिश किया हूँ, आप सब बताएँ कि मेरी कोशिश कैसी है? आज दुःशासन है ,फैला चहुँ ओर ...., उठने ना ...

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लेखक के बारे में

मत पुछ इस पंछी से कहाँ जाना है, पंख पसार उड़ चले हैं, इस उन्मुक्त गगन में, जहां दिन ढल जाये, बस वहीं ठिकाना है। कल आज और कल की फिकर क्यों हो हमे, जब अपनी खिदमत् करता सारा जमाना है ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Hemalata Godbole
    15 अगस्त 2019
    गजब,अति सुंदर भाव,शब्द, निश्चय और प्रे म की पराकाष्ठा।शुभंभवतु.सबकोही ये निश्चय करना है हमे राखी की सौग़ध !
  • author
    Brij Mohan Nanda
    27 अक्टूबर 2018
    बहुत ही बढ़िया लिखा है
  • author
    Gayatri Kharate "राधनी"
    15 अक्टूबर 2018
    very very nice nd osm it is👌👌👌
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    Hemalata Godbole
    15 अगस्त 2019
    गजब,अति सुंदर भाव,शब्द, निश्चय और प्रे म की पराकाष्ठा।शुभंभवतु.सबकोही ये निश्चय करना है हमे राखी की सौग़ध !
  • author
    Brij Mohan Nanda
    27 अक्टूबर 2018
    बहुत ही बढ़िया लिखा है
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    Gayatri Kharate "राधनी"
    15 अक्टूबर 2018
    very very nice nd osm it is👌👌👌