आज,लिख रही हूँ मैं ये कहानी
कल खुद कहानी हो जाऊँगी
गीतों को अपने हूँ मैं गुनगुनाती
हाँ तुमको निशानी दे जाऊँगी
रहूँ न रहूँ मैं कल इस जहाँ में
तुम्हारी ज़ुबानी मैं जी जाऊँगी
कल खुद कहानी हो......
वो खुशियों के किस्से वो नग्मे गमों के
वो रूठे हुए दिन संजो जाऊँगी
मोहब्बत के जो पल गुज़ारे हैं तुम संग
मैं उन पलों को संजो जाऊँगी
कल खुद कहानी हो......
अकेली खड़ी थी मैं जिस सफ़र में
हाँ उस सफ़र को भी लिख जाऊँगी
की थामा है तुमने मेरा हाथ जब भी
मैं वो कहानी भी लिख जाऊँगी
रखना संभाले वो नग्मों के तोहफे
की दिल जिनमे अपना मैं रख जाऊँगी
मुझे याद करके तुम गुनगुनाना
तुम्हारी जुबानी मैं जी जाऊँगी
कल ख़ुद कहानी हो......
💐रुचि गोपाल "रूचिर"💐
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