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कृष्ण भजन

4.5
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कृष्ण भजन छलक-छलक कर , बहक-बहक कर , कान्हा तेरी प्रीत गहूँ| किलक-किलक कर, महक-महक कर, माधव तेरी मीत रहूँ|| तरस-तरस कर, बरस-बरस कर सिमरे हिय दिन-रैन तुझे| हरष-हरष कर,कलश-कलश भर अर्पित हर सुख-चैन...

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लेखक के बारे में

" बस रौ में बहते अलफ़ाज़ ..जो दिल से निकलें और पहुँचे दिल तक " नाम:अंशु त्रिपाठी “अनुजा” जन्मदिवस:१९ सितम्बर १९७६ मूलस्थान:सतना (मध्यप्रदेश) शैक्षिक उपाधि:स्नातकोत्तर(नाभिकीय रसायन), मानव-संसाधन प्रबन्धन प्रकाशित रचनायें: सुगंधा(उपन्यास), मुझे स्वीकार है(उपन्यास), अंतर्मन के प्रतिबिम्ब(कविता संग्रह), भावांजलि, अक्षरों की ओट से, पावनी, अंजुरी, निर्झरिका (समस्त सम्पादित संयुक काव्य संग्रह), उड़ान-एक अनुभूति-साहित्यिक-सामाजिक पत्रिका (शुक्तिका प्रकाशन कोलकाता से सम्बद्ध) तथा एक कहानी संग्रह शीघ्र प्रकाशनार्थ तैयार||

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    26 अगस्त 2024
    भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित अत्यन्त ही सुन्दर भजन । हार्दिक साधुवाद
  • author
    08 मार्च 2023
    लालित्यमय सुन्दर भावपूर्ण भजन ! जय श्री कृष्ण!!
  • author
    योगी योगेन्द्र
    23 जून 2018
    बहुत सुंदर भजन जय श्री कृष्ण
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    अरविन्द सिन्हा
    26 अगस्त 2024
    भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित अत्यन्त ही सुन्दर भजन । हार्दिक साधुवाद
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    08 मार्च 2023
    लालित्यमय सुन्दर भावपूर्ण भजन ! जय श्री कृष्ण!!
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    योगी योगेन्द्र
    23 जून 2018
    बहुत सुंदर भजन जय श्री कृष्ण