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कितनी भयानक रात थी

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कितनी भयानक वो रात ,जिसकी कल्पना भी नहीं थी. भूखे भेड़िये, उसकी इज्जत को तार तार कर रहे थे. चीख सुनकर कोई उसकी मदद को ना वहां आया था. भूखे भेड़िये हँसकर अपनी बारी आने की सोच रहे थे. कांप उठी ...

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लेखक के बारे में
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Asha garg

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समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    श्वेता विजय mishra
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    बहुत बहुत दुखी करने वाली साथ ही गुस्से से भर देने वाली और कड़वी सच्चाई बताती हुई रचना लिखी आपने यह सब देख कर पढ़ कर मन बहुत दुखी हो जाता है
  • author
    Sunanda Aswal
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    बहुत ही सही साक्षात सत्य है लड़की होना अपराध है ... क्या । अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं ।सत्य है
  • author
    शकुन्तला गौतम
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    भयानक डरावनी सच्चाई को भयानक रात विषय के माध्यम से सही प्रस्तुत किया है आपने 👌👌👍
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    श्वेता विजय mishra
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    बहुत बहुत दुखी करने वाली साथ ही गुस्से से भर देने वाली और कड़वी सच्चाई बताती हुई रचना लिखी आपने यह सब देख कर पढ़ कर मन बहुत दुखी हो जाता है
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    Sunanda Aswal
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    बहुत ही सही साक्षात सत्य है लड़की होना अपराध है ... क्या । अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं ।सत्य है
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    शकुन्तला गौतम
    27 ഒക്റ്റോബര്‍ 2021
    भयानक डरावनी सच्चाई को भयानक रात विषय के माध्यम से सही प्रस्तुत किया है आपने 👌👌👍