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ख्वाहिशों की कलम से

3.7
1383

हाँ हाँ दिसम्बर की ये सुबहें और खूबसूरत हो जाती हैं जब तुम लाल हरी टोपी पहने निकलती हो जब तुम्हारे मुँह से जाड़े वाला धुवां निकलता है जब अपने कोमल हाथों को जेबों में छुपाए सड़कों पर चलती हो जब तुम्हारा ...

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लेखक के बारे में

एक पहाड़ी लड़का। उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर कस्बे से हूँ और फिलहाल दिल्ली में दिन गुजार रहा हूँ। थोड़ा-बहुत लिखने का कीड़ा है तो लिखता हूँ, अच्छा बुरा कैसा भी.. पुरस्कारों का नाम नहीं गिनाऊंगा, क्योंकि ऐसा कभी लिखा नही कि कोई पुरस्कार दे🙊😂 कुछ किताब लिखने की इच्छा है, देखें भविष्य क्या दिखाता। बाकी और कुछ है भी नहीं मेरे बारे में जानने जैसा, फिर भी मुझसे जुड़ना चाहो तो- Gmail id : [email protected](इसी जीमेल को फेसबुक के सर्च बॉक्स से सर्च करने पर आपको मेरी फेसबुक प्रोफाइल भी दिख जाएगी।) वैसे मुझे कोई फॉलो करे ऐसा तो मैंने कुछ किया नही लेकिन इसके बाद भी आप मुझे ट्विटर पर फॉलो करना चाहो तो--  @RajuNegi_UK मेरा ट्विटर हैंडल।   

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    लकी निमेष "lucky"
    03 जून 2018
    बहतरीन सर " कच्ची मिटटी " कोभी पढे
  • author
    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    29 जनवरी 2020
    वाह वाह।मेरी रचनाये भी पढे
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    लकी निमेष "lucky"
    03 जून 2018
    बहतरीन सर " कच्ची मिटटी " कोभी पढे
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    PANKAJ KUMAR SRIVASTAVA
    29 जनवरी 2020
    वाह वाह।मेरी रचनाये भी पढे