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ख्वाहिशों की कलम से

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3.7

हाँ हाँ दिसम्बर की ये सुबहें और खूबसूरत हो जाती हैं जब तुम लाल हरी टोपी पहने निकलती हो जब तुम्हारे मुँह से जाड़े वाला धुवां निकलता है जब अपने कोमल हाथों को जेबों में छुपाए सड़कों पर चलती हो जब तुम्हारा...