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ख्वाबों के परिन्दे

4.4
428

इन ख्वाबों के परिन्दों को खुला छोड़ दो आज... बन्द थे एक पिन्जरे में बेड़ियों से जकड़े हुए करने दो इन्हें अपने जी की...सब बन्दिशें तोड़ दो आज इन ख्वाबों के परिन्दों को खुला छोड़ दो आज... सह्मे से बैठे ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    सुमन 'त्रिलोक'
    16 मई 2021
    वाह वाह बेहतरीन सोच जी ⭐⭐⭐⭐⭐⭐
  • author
    Sikandar Vadia
    01 अक्टूबर 2018
    sundar . khvab.
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    सुमन 'त्रिलोक'
    16 मई 2021
    वाह वाह बेहतरीन सोच जी ⭐⭐⭐⭐⭐⭐
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    Sikandar Vadia
    01 अक्टूबर 2018
    sundar . khvab.