पिंजरे में कैद नहीं रहना मुझे... खुला आसमान चाहिए ... उड़ते पंछियों की तरह बेपरवाह बेबाक होकर.. उन आसमान की तेज़ हवाओं को चीर कर... उड़ने का हौसला चाहिए ... ज़मीं से ...
उड़ने का हौसला चाहिए जमीन से जुड़े आसमान को👌👌
पिंजरे में कैद नहीं रहना खुला आसमान चाहिए मुझे👌👌
बहुत ही शानदार सर्जन दीदी आपका,,,,
लाजवाब लिखा आपने अपनी इच्छाओं को और मन के भाव को अपनी आजादी को लेकर लिखे गए शानदार पंक्तियों से भरपूर आपकी रचना,,,
पाठकों को जागरूक करती शिक्षाप्रद सकारात्मक विचारों से सुसज्जित आपकी रचना बहुत बढ़िया लिखा दे दिया आपने
उत्कृष्ट लेखनी प्रदर्शन लाजवाब अभिव्यक्ति दीदी😊🤗💐🙏
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उड़ने का हौसला चाहिए जमीन से जुड़े आसमान को👌👌
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