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खुद से खुद के ताल्लुक़ात महँगे पड़ते हैं

4.1
3759

खुद से खुद के ताल्लुक़ात महँगे पड़ते हैं यहाँ जीने के ख्यालात महँगे पड़ते हैं रात है फ़क़त चंद पलों की महमाँ खाबो पे लगाये बिसात महँगे पड़ते है आँखे न मूंद नाखुदा को यू देख हाथों से दूर हालात महँगे ...

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लेखक के बारे में
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विशाल शर्मा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    mohit kumar
    06 ഫെബ്രുവരി 2019
    अद्वितीय; ग़ज़ले एवं समसामायिक महत्व के लेख पढने के लिए मेरी profile visit करे एवं यथासंभव मूल्याकंन प्रतिक्रिया दें मुझे आपके बहुमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 ജൂലൈ 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
  • author
    नीरज M "M"
    11 ഫെബ്രുവരി 2018
    सुना है खुशी के लम्हात महंगे पड़ते हैं क्या कहूँ ख़ामोश कर डाला
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  • author
    mohit kumar
    06 ഫെബ്രുവരി 2019
    अद्वितीय; ग़ज़ले एवं समसामायिक महत्व के लेख पढने के लिए मेरी profile visit करे एवं यथासंभव मूल्याकंन प्रतिक्रिया दें मुझे आपके बहुमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।
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    रविंद्र कुमार
    02 ജൂലൈ 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
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    नीरज M "M"
    11 ഫെബ്രുവരി 2018
    सुना है खुशी के लम्हात महंगे पड़ते हैं क्या कहूँ ख़ामोश कर डाला