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खुद से खुद के ताल्लुक़ात महँगे पड़ते हैं

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खुद से खुद के ताल्लुक़ात महँगे पड़ते हैं यहाँ जीने के ख्यालात महँगे पड़ते हैं रात है फ़क़त चंद पलों की महमाँ खाबो पे लगाये बिसात महँगे पड़ते है आँखे न मूंद नाखुदा को यू देख हाथों से दूर हालात महँगे ...

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लेखक के बारे में
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विशाल शर्मा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    mohit kumar
    06 फ़रवरी 2019
    अद्वितीय; ग़ज़ले एवं समसामायिक महत्व के लेख पढने के लिए मेरी profile visit करे एवं यथासंभव मूल्याकंन प्रतिक्रिया दें मुझे आपके बहुमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
  • author
    नीरज M "M"
    11 फ़रवरी 2018
    सुना है खुशी के लम्हात महंगे पड़ते हैं क्या कहूँ ख़ामोश कर डाला
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    mohit kumar
    06 फ़रवरी 2019
    अद्वितीय; ग़ज़ले एवं समसामायिक महत्व के लेख पढने के लिए मेरी profile visit करे एवं यथासंभव मूल्याकंन प्रतिक्रिया दें मुझे आपके बहुमूल्य सुझावों का इंतजार रहेगा।
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
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    नीरज M "M"
    11 फ़रवरी 2018
    सुना है खुशी के लम्हात महंगे पड़ते हैं क्या कहूँ ख़ामोश कर डाला